न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट से 24 नवंबर 2024 को हुए संभल बवाल को लेकर कई अहम खुलासे हुए हैं। दुबई से गिरोह चला रहा शारिक साठा पुलिसकर्मियों की हत्या कराना चाहता था। उसका उद्देश्य विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना था। उसकी मंशा थी कि पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद कर्फ्यू लग जाएगा और विवाद राष्ट्रीय स्तर का बन जाएगा।
इससे उसके गिरोह का वर्चस्व भी बनेगा। इसका उल्लेख न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में किया गया है। न्यायिक जांच आयोग को एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने जो बयान दर्ज कराए हैं, उसमें बताया है कि शारिक साठा ने अपने गुर्गों को बवाल में भेजकर गोलियां चलवाई थीं।
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संभल हिंसा (फाइल)
- फोटो : संवाद
गुर्गों ने पुलिस पूछताछ में यह जानकारी दी थी। उसने गुर्गों को विदेशी हथियार भी उपलब्ध कराए थे। जिन हथियारों से गोलियां चलाई गईं। पुलिस और फोरेंसिक टीम को कारतूस, खोखे मिले थे। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हथियार भी बरामद हो गए थे।
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संभल हिंसा (फाइल)
- फोटो : संवाद
जो कारतूस और खोखे मिले थे वह पाकिस्तान में बने हुए थे। एसपी ने ही बताया कि सरायतरीन निवासी बिलाल, कोटगर्वी निवासी नईम, अयान और तुर्तीपुर इल्हा निवासी कैफ की हत्या इस गिरोह ने ही की थी। एक युवक गोली लगने से घायल भी हुआ था।
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संभल हिंसा की तस्वीर (फाइल)
- फोटो : संवाद
अफरोज और वारिस ने की थी हत्याएं
बवाल से पहले शारिक साठा ने अपने गुर्गे गुलाम से एप के माध्यम से बातचीत की थी। पत्नी से भी एप के माध्यम से ही बातचीत की गई थी। गुलाम ने ही हथियार मुल्ला अफरोज और वारिस को उपलब्ध कराए थे। इन हथियारों से ही गोलियां चलाई गईं। एसपी ने न्यायिक जांच आयोग को दिए बयान में यह भी बताया कि वह एप का इस्तेमाल बातचीत के लिए इसलिए कर रहा था ताकि उस तक पुलिस न पहुंच सके लेकिन उसके गुर्गे पकड़े गए तो पूरी साजिश का राजफाश हो गया।
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हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक सट्टा के घर की कुर्की (फाइल)
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2020 में नकली पासपोर्ट बनवाकर दुबई भागा साठा
हथियार, सोना तस्करी के अलावा आईएसआई के नकली नोट भारत में खपाने के लिए सक्रिय रहे शारिक साठा को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हथियार और नकली नोट के मामले दर्ज किए गए थे। सोना तस्करी उसके भागने के बाद उजागर हुई थी।