संभल शहर में 24 नवंबर 2024 को हुए बवाल की न्यायिक आयोग द्वारा जांच की शुरुआत एक दिसंबर 2024 को टीम के संभल पहले दौरे के साथ हुई थी। सूत्र बताते हैं कि जांच पूरी होने के बाद आयोग ने जो रिपोर्ट तैयार की है वह 450 पन्नों की है। इसमें पूर्व के वर्षों में हुए संभल के सभी बड़े दंगों का भी जिक्र है। इन दंगों के हवाले से साफ किया गया है कि बवालों की आड़ में किस तरह संभल में हिंदू-मुस्लिम आबादी का अनुपात बदलकर राजनीतिक लाभ लिए गए थे।
आयोग ने संभल बवाल की जांच के दौरान अलग-अलग समय पर चार दौरे किए थे। जामा मस्जिद समेत प्रमुख स्थानों को देखा था। पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका के कर्मचारियों के बयान लिए थे। आम लोगों ने भी बवाल की आंखों देखी तस्वीर बयां की थी, जिनको बयान के तौर पर दर्ज किया गया था। न्यायिक आयोग की यह रिपोर्ट 28 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी है।
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संभल हिंसा को एक साल पूरा
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सूत्रों के मुताबिक न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में संभल के प्रमुख 15 दंगों का जिक्र है। इसमें देश की आजादी से पहले 1936 में हुए दंगे की जानकारी है तो स्वतंत्रता के समय देश के बंटवारे दौरान सन 1947 में मजहबी नीयत से हुए हमलों की बात भी है। इसके अलावा वर्ष 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001 के दंगे और 2019 तथा 2024 के बवाल का भी उल्लेख है।
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संभल हिंसा फाइल फोटो
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आयोग ने सन 78 के दंगा पीड़ित परिवार के सदस्यों से भी मुलाकात की थी। उन्होंने पूर्वजों द्वारा बताई आपबीती बयान के तौर पर दर्ज कराई थी। संभल के इतिहास में काले पन्ने के तौर पर दर्ज सन 78 के दंगे में रामशरण दास रस्तोगी और बनवारी लाल गोयल की जान गई थी। जांच के दौरान इनके परिजनों ने आयोग से मुलाकात की थी।
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दंगों से हुआ डेमोग्राफिक बदलाव, अल्पसंख्यक हो गए बहुसंख्यक
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में दंगों के पीछे धार्मिक उन्माद वजह मानी गई है। 1978 के दंगे से हिंदू आबादी के प्रभावित होने के साथ-साथ पलायन का भी उल्लेख है। माना है कि इन दंगों के चलते ही संभल की हिंदू आबादी 45 से 15 प्रतिशत पर पहुंच गई। साथ ही कई धर्मस्थलों का अस्तित्व मिटा दिया गया था।
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संभल हिंसा फाइल फोटो
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इनको अब कब्जामुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाया दा रहा है। जीर्णोद्धार भी किया जा रहा है। कहा गया है कि इन दंगों के चलते ही संभल में डेमोग्राफिक बदलाव हुआ है। न्यायिक जांच आयोग ने 200 लोगों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज करने के लिए निर्देश दिए थे लेकिन 199 लोग ही बयान दर्ज कराने के लिए पहुंचे थे।