संभल के जुनावई में बहू के घर आने की खुशी में संतोषी चमक रहीं थीं। जब बेटे को घर से दूल्हा बनाकर रवाना किया था तो नजर उतारी थी। गांव की कई महिलाएं ढोल बजाने की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान अचानक से हादसे की सूचना मिली।
संतोषी को नहीं पता था कि बेटे की मौत हो गई। उन्हें बरात की गाड़ी का मामूली हादसा होने की जानकारी दी थी। यह बातें गांव की उन महिलाओं ने बताईं जो दूल्हे के रवाना होने के दौरान संतोषी के साथ रुकी थीं।
कमला देवी ने बताया कि उस समय तक किसी को यह अंदाजा नहीं था कि हादसा इतना भीषण होगा कि आठ लोगों की जान चली जाएगी क्योंकि जिस स्थान पर हादसा हुआ है वह गांव से कुछ ही दूरी पर था।
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विलाप करते परिजनों से मिलतीं एसडीएम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांव के लोग पहुंचे तो मंजर देखकर सभी बिलख पड़े थे। संतोषी को बेटे और बेटी समेत आठ लोगों की मौत की जानकारी देर रात किसी तरह हो गई थी। उसके बाद हालत बिगड़ गई। महिलाओं ने बताया कि सूरज बड़ा बेटा था इसलिए पूरे परिवार को शादी का बड़ा अरमान था।
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बिल्सी के सिरतौल में शादी के पंडाल में पसरा सन्नाटा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छह महीने पहले ही रिश्ता तय हुआ था और बृहस्पतिवार को लगन आई थी। लगन समारोह धूमधाम से मनाया गया था। बरात की तैयारियों को लेकर भी परिवार के साथ रिश्तेदार भी खुश थे।
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परिवार से जानकारी लेतीं एसडीएम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राजस्थान में रहकर मेहनत मजदूरी करता था सूरज
सूरज के ताऊ ने बताया कि सूरज अपने परिवार के साथ राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में रहकर नदी पर रेत छानने में मेहनत मजदूरी का काम करता था। शादी तय हुई तो गांव से ही शादी करने की तैयारी की थी। एक महीने पहले ही गांव आए थे। उसके बाद से ही शादी की तैयारियों में लगे थे। घर में भी मरम्मत कराई गई थी। होनी का कुछ ओर ही मंजूर था। एक हादसे ने कई परिवार की खुशियां छीन लीं।
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दूल्हे सूरज की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तीन जून को आई थी लगन, दुल्हन पक्ष ने घरेलू सामान भी भेज दिया था
सूरज का रिश्ता छह महीने पहले तय हुआ था। तीन जून को लगन आई थी। इसी लगन समारोह में दुल्हन पक्ष के लोग घरेलू उपयोग का सभी सामान सूरज के घर दे गए थे। बरात शुक्रवार की शाम को निकलनी तय थी।