यूपी के मुरादाबाद स्थित मकरंदपुर-धर्मपुर-जलालपुर रोड के किनारे स्थित बाग में आम के पेड़ पर मजदूर सतेंद्र सिंह (28) का शव लटका मिला। पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या बताया। उधर परिजन किसी भी तरह की गृह कलह से इनकार कर रहे हैं।
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सतेंद्र सिंह
- फोटो : अमर उजाला
घरवालों से हुई थी कहासुनी
सतेंद्र सिंह थाना कुंदरकी के महमूदा नगला गांव के निवासी कमल सिंह का पुत्र था। वह दिल्ली में कॉम्प्लैक्स बनाने वाले ठेकेदार के अधीन मजदूरी करता था। वह चार दिन पहले दिवाली मनाने के लिए अपने गांव महमूदा नगला आया था। बुधवार शाम घरवालों से किसी बात पर मामूली कहासुनी हुई। रात लगभग 10 बजे टहलने की बात कह घर से निकल गया। इसके बाद वापस नहीं लौटा। आधी रात तक न लौटने पर परिजन सोचने लगे कि वह चाचा के घर सो गया होगा।
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गमगीन परिजन
- फोटो : अमर उजाला
आम के बाग में मिली लाश
गुरुवार सुबह आठ बजे तक जब सतेंद्र घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। इस दौरान उसका छोटा भाई मुलायम सिंह धर्मपुर-जलालपुर रोड पर तलाश करते हुए रोड के दक्षिण तरफ स्थित आम के बाग में गया। जहां पेड़ पर सतेंद्र का लटका हुआ शव मिला। सूचना पर बिलारी थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह तथा फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची।
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गमगीन परिजन
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बहन के टुपट्टे को बनाया फंदा
थाना प्रभारी ने बताया कि सतेंद्र के गले में दुपट्टे का फंदा लगा हुआ था। प्राथमिक पूछताछ में यह दुपट्टा सतेंद्र की बहन का पाया गया। पुलिस ने शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों ने कहा कि घर में सतेंद्र के साथ कोई विवाद नहीं हुआ था। भाई मुलायम सिंह ने भी बताया कि परिवार में कोई मनमुटाव नहीं था। बिलारी थाना प्रभारी ने बताया कि सतेंद्र अविवाहित था और घर वाले उसे शराब पीने को लेकर डांटते थे। उन्होंने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही इसका पता चलेगा।
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गमगीन परिजन
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दो बहनों भैयादूज मनाने की हसरत रह गई अधूरी
भैयादूज के त्योहार मनाने की उसकी दोनों बहनों प्रभा और सुदर्शना की हसरत अधूरी रह गई। सतेंद्र के परिवार में पिता कमल सिंह और माता ओमवती के अलावा दो छोटे भाई पप्पू सिंह और मुलायम सिंह हैं। तीनों भाइयों में किसी की अभी तक शादी नहीं हुई है। परिजन रिश्ता मिलने पर छह माह बाद सतेंद्र की शादी करने की योजना बना रहे थे। दोनों बहनों प्रभा और सुदर्शना की शादी हो चुकी है। सतेंद्र बड़ा भाई होने के नाते दोनों बहनों को उससे बहुत उम्मीद लगी रहती थी। भैयादूज का त्योहार मनाने के लिए प्रभा बुधवार शाम को ही अपने मायके पहुंच गई जबकि सुदर्शना गुरुवार सुबह ससुराल से मायके पहुंची। दोनों बहनें अपने मायके में भैयादूज का त्योहार मनाने की खुशियों के बीच तैयारियां कर रही थीं। इसी बीच दुख भरा समाचार मिल गया।