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क्रिकेट का मैदान हो या सियासी पिच, हर जगह दिखता था चेतन चौहान ने लगाए छक्के
Mon, 17 Aug 2020 08:57 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, अमरोहा
अमर उजाला ब्यूरो, अमरोहा
Published by: प्राची प्रियम
Updated Mon, 17 Aug 2020 08:57 PM IST
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चेतन चौहान
- फोटो : अमर उजाला
क्रिकेट का मैदान हो या सियासत की पिच, दोनों पर ही चेतन चौहान का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा था। क्रिकेट की तरह राजनीतिक रास्तों पर भी असफलताओं के कई बाउंसर आए, लेकिन जुझारू तेवर से सामना करके वह आगे बढ़ते रहे। हमेशा के लिए उनके दूर हो जाने के बाद क्रिकेट प्रेमियों से लेकर राजनीतिज्ञों तक के बीच उनके इस तेवर को याद किया जा रहा है। सराहा जा रहा है।
ब्रजघाट पर जुटी लोगों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
करीबी बताते हैं कि बतौर क्रिकेटर चेतन चौहान को स्थापित होते समय काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने डटकर सबका मुकाबला किया और टीम इंडिया में सुनील गावस्कर के साथ सलामी बल्लेबाजी की ऐसी जोड़ी बनाई, जिसे आज भी याद किया जाता है।
लोगों ने दी श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
क्रिकेट से दूर होने के बाद सियासत में उनका पदार्पण भाजपा के कुछ नेताओं की राय पर हुआ था। अमरोहा संसदीय सीट से 1991 का पहला चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे, लेकिन दूसरा चुनाव हार गए थे। इसके बाद वर्ष 1998 का चुनाव जीतकर दोबारा सांसद बने थे।
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रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद अमरोहा और दिल्ली में लगातार दो लोकसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। तब राजनीति के रणनीतिकार उनकी सियासी पारी पर विराम लगता मानने लगे थे। चेतन चौहान इससे विचलित नहीं हुए और पिच बदलकर लोकसभा की जगह विधानसभा का रुख किया। करीब सात साल बाद वर्ष 2017 में अमरोहा जिले की नौगांवा विधानसभा सीट से जीत दर्ज करके प्रदेश सरकार की कैबिनेट में शामिल हुए।
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मंत्री चेतन चौहान
- फोटो : amar ujala
शीला दीक्षित के बेटे के खिलाफ दिल्ली से लड़ा था चुनाव
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और रालोद का गठबंधन था। अमरोहा की सीट रालोद के खाते में आई थी। ऐसे में चेतन चौहान को पार्टी ने दिल्ली से चुनाव मैदान में उतारा था। वहां उन्होंने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी थी।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और रालोद का गठबंधन था। अमरोहा की सीट रालोद के खाते में आई थी। ऐसे में चेतन चौहान को पार्टी ने दिल्ली से चुनाव मैदान में उतारा था। वहां उन्होंने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी थी।