जौहर ट्रस्ट को चंदा देने और जौहर यूनिवर्सिटी में निर्माण कराने वाले रामपुर के मूल निवासी बिल्डर एवं ठेकेदार सैयद खालिद के सपा शासन में कराए गए अन्य सरकारी निर्माण कार्य भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में हैं। पता चला है कि खालिद समेत छह ठेकेदारों ने आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी में 28 से ज्यादा भवनों का निर्माण कराया था।
उस दौर में इन्हें प्रदेश के अन्य शहरों में हुए कई सरकारी कामों के ठेके भी मिले थे। ईडी की जांच में इन सभी ठेकेदारों के अन्य शहरों में कराए कामों से जुड़ा रिकॉर्ड भी खंगाला जाएगा।
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रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय
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सूत्र बताते हैं कि ईडी की टीम
जौहर यूनिवर्सिटी में बने शैक्षणिक और प्रशासनिक भवनों समेत अन्य निर्माण से जुड़े ठेके-ठेकेदार, कराए गए काम, खर्च-भुगतान और वित्तीय लेनदेन का ब्योरा जुटा रही है। निर्माण से जुड़े अनुबंध, बिल, भुगतान की रसीदें, बैंक खातों का लेनदेन और फर्मों के बीच हुए वित्तीय व्यवहार से संबंधी कागजों को भी जांचा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक ईडी के सामने आई जानकारी के अनुसार यूनिवर्सिटी में निर्माण कार्य करने वाले कुछ ठेकेदारों ने लखनऊ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और नोएडा समेत प्रदेश के कई जिलों में सरकारी विभागों के ठेके लेकर भी निर्माण कार्य कराए थे।
पड़ताल में यह देखा जा रहा है कि इन ठेकेदारों को कौन-कौन से सरकारी विभागों से क्या-क्या काम मिले, उनकी लागत कितनी थी, भुगतान किस खाते में हुआ और इन कारोबारों से जुड़े धन का आगे किस तरह इस्तेमाल हुआ। विभिन्न विभागों से भी इस मामले में जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
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आजम खां और बेटे अब्दुल्ला
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जब्त दस्तावेजों से कड़ियां जोड़ने की कवायद
ईडी की हालिया कार्रवाई के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े लोगों के साथ ठेकेदारों के ठिकानों पर भी जांच की गई थी। इस दौरान दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड खंगाले गए। कुछ जब्त भी किए गए।
अब इन्हीं रिकॉर्ड से ठेकेदारों और यूनिवर्सिटी के बीच वित्तीय संबंधों की कड़ियां जोड़ने की कवायद की जा रही है। जांच एजेंसी सरकारी ठेकों से जुड़े भुगतान, ठेकेदारों के खातों और यूनिवर्सिटी में हुए निर्माण पर खर्च की गई रकम के बीच संभावित संबंध की पड़ताल कर रही है।
आगे और नाम सामने आने की संभावना
जौहर यूनिवर्सिटी में हुए निर्माण और उससे जुड़े ठेकेदारों का प्रदेश के कई जिलों में सरकारी काम करना जांच के गंभीर रुख का इशारा दे रहा है। दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड की पड़ताल आगे बढ़ने पर पुराने समय के ठेके तय होने से लेकर निर्माण पूरे होने तक इससे जुड़े अन्य लोगों और फर्मों की भूमिका भी सामने आ सकती है।