सोशल मीडिया के फ्रेंड लिस्ट के दोस्त आभासी दुनिया में ही अच्छे लगते हैं। वास्तविक जीवन में हमारे साथ रहने वाले मित्र, रिश्तेदार और माता-पिता ही विपरीत परिस्थिति में साथ होते हैं। इसलिए हमें अपनी खुशी हो या फिर कोई गम या परेशानी, उसे अपने माता-पिता व अपने करीबियों के साथ ही साझा करना चाहिए।
अमर उजाला अपराजिता: खुशी हो या गम... माता-पिता से करें साझा, विशेषज्ञ ने दूर की छात्राओं की जिज्ञासा
ये बातें अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज की सामाजशास्त्र विभाग की प्रोफेसर अंचल गुप्ता ने कहीं। उन्होंने छात्राओं के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को भी शांत किया।
प्रताप सिंह हिंदू गर्ल्स इंटर कॉलेज में 'सोशल मीडिया और सामाजिक रिश्ते' विषय पर हुई कार्यशाला में प्रो. अंचल गुप्ता ने कहा कि बदलते वक्त में सोशल मीडिया की वजह से रिश्तों में संवाद कम हो रहा है। कई बार माता-पिता को अपने बच्चों के बारे में चीजें सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट से पता चलती हैं।
छात्राओं के सवाल, विशेषज्ञ के जवाब
सवाल- सोशल मीडिया पर कितना समय बिता सकते हैं, ताकि हमारा मनोरंजन हो सके। - सदफ सलमान, छात्रा
जवाब- मनोरंजन के दूसरे साधन हैं। हमें डिजिटल गेम्स के बजाय वास्तविक खेलों पर ध्यान देना चाहिए। यदि फोन देखना ही है तो 24 घंटे में अधिकतम आधा घंटे का समय पर्याप्त है।
सवाल- कई बार पढ़ाई से भी डर लगने लगता है। क्या करना चाहिए।- अनम, छात्रा
जवाब- सबके जीवन में ऐसे पल आते हैं। इसलिए जरूरत है कि हम अपनी रुचि के विषय को पहले पढ़ें। जैसे-जैसे रुझान बढ़ता जाएगा तनाव और डर खत्म हो जाएगा।