शारदीय पूर्णिमा पर मां विंध्यवासिनी के दरबार में शुक्रवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। श्रद्धालु गंगा में स्नान करने के बाद दान कर पुण्य के भागी बने। कालीखोह में मां काली और पहाड़ पर विराजमान मां अष्टभुजा देवी का भी दर्शन-पूजन कर भक्तों ने लंगूरों को चना भी खिलाया।
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दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की कतार।
- फोटो : दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की कतार।
नवरात्र के बाद विंध्य क्षेत्र की साफ-सफाई न कराए जाने से पूर्णिमा पर दर्शनार्थियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं को गंदगी भरे राहों से होकर गुजरना पड़ रहा था। विंध्याचल मंदिर में सुबह से ही मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने वाले दर्शनार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। जो देर रात्रि तक अनवरत चलता रहा।
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दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की कतार।
- फोटो : अमर उजाला।
शुक्रवार का दिन होने के कारण मां की आराधना करने के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित बाबा भोलेनाथ का विधिवत दर्शन-पूजन किया। माता के भव्य शृंगार स्वरूप के दर्शन को लालायित नर-नारी और बच्चे न्यू वीआईपी रोड और गंगा घाट की तरफ जाने वाली गली में जयकारे लगाते हुए कतारबद्ध रहे।
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दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की कतार।
- फोटो : अमर उजाला।
मंदिर में उमड़े दर्शनार्थियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त फोर्स की जहां व्यवस्था की गई थी वहीं पंडा समाज के लोगों भी भीड़ को नियंत्रित कर अपना सहयोग देते रहे। मां विंध्यवासिनी के दर्शनोपरांत महिला श्रद्धालुओं में ज्यादातर गलियों में सजी दुकानों पर ने खिलौने व शृंगार के सामानो की खरीदारी में जुटी रही।