हम जिसके पीछे लग जाते हैं लाइफ बना देते हैं... यह डायलॉग आज रिलीज हो रही फिल्म ज़ीरो में शाहरुख खान बोलते नजर आएंगे, लेकिन यह सिर्फ एक डायलॉग नहीं, बल्कि एक ज़िद है। यानि इंसान कोई काम ठान ले तो नामुमकिन कुछ नहीं। मेरठ की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म की खासियत कि इसमें शाहरुख बउवा सिंह एक बौने (छोटे कदवाला इंसान) की भूमिका में हैं। जिसका कद छोटा है लेकिन इरादे 7 फुट से भी लंबे हैं। फिल्म में बउआ सिंह भी घंटाघर पर कुछ ऐसे कारनामें करता दिखेगा जो उसके कद से कहीं बड़े हैं...
Zero release: ये हैं असली बउआ सिंह, कद है छोटा, लेकिन हौसले बड़े
ज़ीरो फिल्म के बउआ सिंह जैसे हमारे शहर में भी कई ऐसे बउआ सिंह हैं, जो हर दूसरे पल हंसी का पात्र बनते हैं। दिन में कई बार सामाजिक उपेक्षा और तिरस्कार से जूझते हैं, लेकिन जिंदगी के प्रति इनका सकारात्मक रवैया, कमी को अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ने का जुनून इन्हें हारने नहीं देता। मेरठ के ये बउआ सिंह निराश नहीं होते बल्कि हर व्यंग्य का मजबूती से सामना करते हुए आगे बढ़ते हैं।
अपने वजूद को कायम करना है तौफीक का जुनून
महताब सिनेमा के पास रहने वाले 36 वर्षीय तौफीक कहते हैं कि शारीरिक रूप से ऊपरवाले ने जो कमी मुझे दी है उसके लिए तो मैं कुछ नहीं कर सकता, लेकिन मुश्किल से जीतकर अपनी नई पहचान बना सकता हूं। तौफीक घंटाघर पर एक दुकान में नौकरी करते हैं। परिवार में मां, पिता और एक बहन हैं। तौफीक कहते हैं पिताजी काम करते हैं, पढ़ाई में मेरा मन नहीं लगा इसलिए खुद नौकरी में लग गया। पहले जब लोग मज़ाक उड़ाते थे तो गुस्सा आता था। इस गुस्से ने कई बार मेरा ही नुकसान किया। अब जब भी कोई मज़ाक उड़ाता है तो हंसकर टालता हूं और मुकेश के गाने सुनकर दिल बहलाता हूं। ज़ीरो फिल्म जरुर देखूंगा। क्योंकि यह फिल्म हम छोटे कद वालों पर बनी है। हमारे अधूरेपन को दिखाया है। शायद लोगों को फिल्म देखकर हम लोगों की परेशानी समझ आए।
वीरू ने परिवार के लिए ठुकराया बॉलीवुड का ऑफर
शिवशक्ति नगर निवासी वीरू (50 वर्षीय) जब 20 साल के थे तब उन्हें बॉलीवुड से फिल्मों का ऑफर आया, लेकिन मां लीलावती ने जाने नहीं दिया। वीरू को भी परिवार को छोड़कर मुंबई जाना रास नहीं आया। पांचवीं तक शिक्षित वीरू निजी नौकरी में हैं। नियमित हिंदी अखबार पढ़ते हैं। घूमने और हिंदी फिल्में देखने के शौकीन वीरू का कहना है कि शुक्रवार को फिल्म ज़ीरो का पहला शो मैं देखूंगा, क्योंकि यह फिल्म छोटे कद वालों पर है। वीरू मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च हर जगह जाते हैं। अपने अधिकारों के प्रति भी सजग हैं, कोई मजाक उड़ाता है तो उसे मजा भी चखाते हैं।
रिजवान बने स्वच्छता के ब्रांड एंबेसडर
महताब सिनेमा के पास रहने वाले रिज़वान 30 साल के हैं। अपना कारोबार करते हैं। रिज़वान की तरह उनकी पत्नी महरुनिशा भी छोटे कद की हैं। परिवार में छह भाई बहन हैं। रफ़ी साहब के गाने सुनने के शौकीन रिज़वान कहते हैं किस्मत है जो किसी इंसान को कैसा बना दे कह नहीं सकते। अपनी कमी को मैंने अपनी हार नहीं बनने दिया। उनके हर मजबूत फैसले में पत्नी पूरा साथ देती हैं। अपने मोहल्ले में लोगों को सफाई के प्रति जागरुक करते हैं इसलिए हाल में ही नगर निगम ने रिज़वान को स्वच्छता का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त कर सम्मानित भी किया है।