यूपी के लाल ने एक बार फिर देश का नाम ऊंचा कर दिया। बागपत जिले के पहलवान सचिन राठी ने दिल्ली में चल रही एशियन चैंपियनशिप में रविवार को 74 किलोग्राम भार वर्ग में मंगोलिया के पहलवान को पटखनी देकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। सचिन की इस कामयाबी से न सिर्फ उनके गांव वाले, बल्कि पूरा देश गौरवान्वित है। आइए जानते हैं आखिर कैसे शुरू हुआ उनका कुश्ती का सफर :-
कैसे कुश्ती का चैंपियन बना पहलवान सचिन राठी और क्या है कामयाबी की वजह
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शौक में शुरू की कुश्ती
बागपत के गांगनौली गांव में रहने वाले सचिन राठी अपनी कामयाबी की प्रेरणा अपने चाचा को मानते हैं। पहलवान सचिन राठी के चाचा संजय राठी भी पहलवान है। कुश्ती से जुनून की हद तक प्यार करने वाले सचिन का कहना है कि तीन साल पहले कांस्य पदक मिलने पर वह अपने आप से नाखुश थे, लेकिन अब सोना जीतने के बाद वह बेहद खुश हैं। इसका श्रेय वह अपने परिवार और कोच को देते हैं। सचिन के बड़े भाई मनोज ने बताया कि करीब आठ साल पहले खुद ही गांव के लड़कों के साथ कुश्ती शुरू की।
चाचा से मिली प्रेरणा
सचिन के मुताबिक कुश्ती के इस सफर की शुरुआत उनके चाचा की प्रेरणा से शुरू हुई थी। उनके चाचा संजय सेना में रहे और वह पहलवानी करते थे। चाचा से ही कुश्ती की जानकारी मिली। उन्होंने ही कुश्ती के लिए प्रेरित किया। इसके बाद सचिन ने गांव के अखाड़े में जाना शुरू किया। यहां भी चाचा ने खूब हौंसला बढ़ाया। धीरे-धीरे बारीकियां सीखी और चाचा की सलाह पर ही दिल्ली की राह पकड़ी। बड़े भाई मनोज कुमार, संजीव कुमार, प्रवीण कुमार ने सहयोग किया। बस फिर क्या था अपनो का साथ और कड़ी मेहनत के बाद सचिन की कामयाबी का सिलसिला शुरू हो गया।
फिर शुरू हुआ कामयाबी का सिलसिला
शौक में शुरू किए गए खेल में सचिन रच-बस गया। वह धीरे-धीरे दंगल में हिस्सा लेने लगे। नाम कमाया और जिले से लेकर राज्य स्तर तक पदक जीते। अपने खेल के दम पर आगे बढ़ता चला गए। साल 2015 में उसने एशियन कुश्ती में कांस्य पदक जीता था, तब ऐसा लगा कि प्रदर्शन कुछ कमजोर रहा है, लेकिन इस बार सोने के तमगे पर दांव लगाया। सचिन ने कहा कि सेमीफाइनल का मुकाबला जोरदार रहा। ईरान के पहलवान से उसकी कड़ी टक्कर हुई।
नेवी में नायब सूबेदार है सचिन
गांगनौली गांव के बेटे सचिन नेवी में नायब सूबेदार हैं। खेल कोटे से ही उनकी भर्ती हुई। परिजनों का कहना है कि कुश्ती शौक में शुरू की, इसके बाद कुश्ती सचिन के लिए जुनून बन गई। दिल्ली के हनुमान अखाड़े में ही वह कुश्ती का अभ्यास करते हैं।
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