बागपत के सिनौली में उत्खनन से मिले युद्ध रथ से सभ्यता के काल क्रम पर नई बहस शुरू हो गई है। कुछ इतिहासकार इसे ताम्र युगीन बता रहे हैं, जबकि कुछ का दावा है कि यह महाभारतकाल से जुड़ी हो सकती है। करीब पांच हजार साल पहले सिर्फ मेसोपोटामिया, ग्रीक और जॉर्जिया की सभ्यता में ही रथ मिलने के प्रमाण हैं। सिनौली में मिले रथ का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्व है।
अद्भुत है उत्खनन में मिला रथ, इतिहासकारों के बीच छिड़ी बहस, देखें तस्वीरें
सिनौली में मिला रथ अद्भुत है। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन बताते हैं कि सिनौली जैसे रथ सिर्फ मेसोपोटामिया, जार्जिया और ग्रीक सभ्यता में ही मिले हैं। जाहिर है कि यहां की सभ्यता की तरह ही भारतीय उपमहाद्धीप के लोग भी रथ का प्रयोग करते थे और यहां की सभ्यता भी बेहद विकसित थी।
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उत्खनन में मिले रथ से इस बात की भी पुष्टि होती है कि यहां के लोग लड़ाकू प्रवृत्ति के रहे हैं। सिनौली में मिले रथ की बनावट इसके समकालीन मेसोपोटामिया से मेल खाती है। रथ के साथ पुरातत्वविदों को मुकुट भी मिला है, जो रथ की सवारी करने वाले योद्धा के द्वारा पहना जाता था। जैन कहते हैं कि यह महाभारतकालीन सभ्यता के संकेत हैं।
सिनौली में बृहस्पतिवार को एक बार फिर पुरातत्व विभाग की टीम पहुंचेंगी। यहां अब तक मिले अवशेषों का अध्ययन करेंगी। इतिहासकारों की टीम आएगी।
सिनौली में उत्खनन के दौरान महत्वपूर्ण चीजें सामने आने के बाद यहां बुधवार को दिनभर लोगों की आवाजाही रही। क्षेत्र के ग्रामीण भी प्राचीन रथ को देखने पहुंचे।
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