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बारिश ने पटरी से उतारा जनजीवन, फसलों पर संकट, आज फिर बारिश के आसार, बढ़ेगा कोहरा

Thu, 09 Jan 2020 12:50 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 09 Jan 2020 12:50 PM IST
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weather update: chance of rain in many district in wester UP with Meerut
wheat crop - फोटो : अमर उजाला
मौसम का मिजाज एक बार फिर गड़बड़ा गया है। मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश बुधवार को भी पूरे दिन रुक-रुककर जारी रही। पश्चिमी यूपी में मेरठ समेत कई जिलों में बुधवार को तेज बारिश हुई। मेरठ में जानीखुर्द के आसपास हल्की ओलावृष्टि भी हुई। अगर साढ़े चार मिमी बारिश और हो गई तो जनवरी 1999 में हुई बारिश का रिकॉर्ड टूट जाएगा। जनजीवन प्रभावित होने के साथ यह बारिश फसलों के लिए भी नुकसानदेह है।
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rain, winter meerut - फोटो : अमर उजाला
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम में यह बदलाव आया है।  ठंड और तेज हवाओं के चलते लोग घरों में दुबके रहे। मौसम विभाग के मुताबिक 21 साल में 1 से 8 जनवरी के बीच पहली बार रिकार्ड 36 मिमी बारिश दर्ज की गई। गुरुवार को भी सुबह से ही शीतलहर चली और मौसम सर्द बना रहा। हालांकि दोपहर में धूप खिली लेकिन ठंड बरकरार है।
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rain, winter meerut - फोटो : अमर उजाला

सन 1999 में 44.3 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, इससे पहले 1989 में 48.3 मिमी बारिश हुई थी। अभी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। गुरुवार को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे। कोहरे के साथ बारिश के भी आसार हैं। बुधवार को अधिकतम तापमान 14.5 और न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।       


 
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rain, winter meerut - फोटो : अमर उजाला

प्रदूषण से मिली राहत
तेज बारिश व सर्द हवाओं के चलने से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में गिरावट दर्ज की गई है। मेरठ का एक्यूआई 107, पल्लवपुरम का एक्यूआई स्तर 99 दर्ज किया गया।

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crop - फोटो : अमर उजाला

गेहूं की बुवाई पिछड़ी
गन्ने की कटाई के बाद जो किसान गेहूं की बुवाई करने की सोच रहे थे, उनके लिए बारिश ने मुसीबत खड़ी कर दी है। बारिश के बाद ओट (पलेवा) होने में कम से कम 15 से 20 दिन लगेंगे, जिसके बाद तापमान में वृद्धि होने लगेगी। दिन भी बड़ा होने लगेगा। गेहूं की फसल की बुवाई के लिए कम तापमान चाहिए, जबकि उसे पकने के लिए बड़े दिन व अधिक तापमान चाहिए।

इस बारिश से सबसे अधिक उन किसानों को निराशा लगी है, जो पछेती फसल में गेहूं की बुवाई करने की सोच रहे थे। फूलों, सब्जियों और सरसों की फसल भी बारिश से प्रभावित होगी। बारिश बंद होने के बाद समय से पानी की निकासी कर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। सरसों की फसल पर यूरिया छिड़ककर रोग से बचाया जा सकता है।

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