बारिश ने पटरी से उतारा जनजीवन, फसलों पर संकट, आज फिर बारिश के आसार, बढ़ेगा कोहरा
सन 1999 में 44.3 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, इससे पहले 1989 में 48.3 मिमी बारिश हुई थी। अभी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। गुरुवार को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे। कोहरे के साथ बारिश के भी आसार हैं। बुधवार को अधिकतम तापमान 14.5 और न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
प्रदूषण से मिली राहत
तेज बारिश व सर्द हवाओं के चलने से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में गिरावट दर्ज की गई है। मेरठ का एक्यूआई 107, पल्लवपुरम का एक्यूआई स्तर 99 दर्ज किया गया।
गेहूं की बुवाई पिछड़ी
गन्ने की कटाई के बाद जो किसान गेहूं की बुवाई करने की सोच रहे थे, उनके लिए बारिश ने मुसीबत खड़ी कर दी है। बारिश के बाद ओट (पलेवा) होने में कम से कम 15 से 20 दिन लगेंगे, जिसके बाद तापमान में वृद्धि होने लगेगी। दिन भी बड़ा होने लगेगा। गेहूं की फसल की बुवाई के लिए कम तापमान चाहिए, जबकि उसे पकने के लिए बड़े दिन व अधिक तापमान चाहिए।
इस बारिश से सबसे अधिक उन किसानों को निराशा लगी है, जो पछेती फसल में गेहूं की बुवाई करने की सोच रहे थे। फूलों, सब्जियों और सरसों की फसल भी बारिश से प्रभावित होगी। बारिश बंद होने के बाद समय से पानी की निकासी कर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। सरसों की फसल पर यूरिया छिड़ककर रोग से बचाया जा सकता है।