मेरठ जिले में ताबड़तोड़ हत्या होने का सिलसिला जारी है। दो बदमाशों ने मंगलवार को दिनदहाड़े एक और सनसनीखेज वारदात को अंजाम दे दिया। जानी क्षेत्र के बाफर गांव में सुबह नौ बजे पूर्व ब्लॉक प्रमुख के बेटे की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी।
विकेंद्र हत्याकांड: मर्डर से पहले कई बार घर आए थे हत्यारे, साथ खाते थे खाना, सामने आए कई बड़े राज
पूर्व ब्लाक प्रमुख के बेटे की हत्या की वारदात के बाद गांव में दहशत का माहौल है। परिवार के लोगों में कोहराम मचा हुआ है। देर रात पोस्टमार्टम के बाद विकेंद्र के शव का पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।
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पूर्व ब्लाक प्रमुख राजवीरी का बेटा विकेंद्र उर्फ गौरी (40) अपने घर पर पत्नी गुड्डी व बेटे अंश के साथ था। बाइक पर दो युवक विकेंद्र के पास घर पर आए। विकेंद्र ने दोनों को चाय भी पिलाई। जाते समय विकेंद्र पर गोलियां दाग दीं।
गोलियों की आवाज सुनकर पत्नी और बेटा चिल्लाते हुए बदमाशों को पकड़ने के लिए उनके पीछे भी दौड़ेे। बदमाश बाइक को वहीं छोड़कर फायरिंग करते पैदल ही भाग गए। परिजनों ने विकेंद्र को मेरठ में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं पुलिस जांच पड़ताल में कई अहम बातें सामने आई हैं।
पुलिस ने बताया कि तीन साल पहले बाफर गांव में जितेंद्र की हत्या हुई थी। जिसमें विकेंद्र नामजद आरोपी था। इसी रंजिश में हत्या हुई है। विकेंद्र के परिजनों ने जितेंद्र के दोनों बेटे विशाल और सागर के अलावा धमेंद्र व पुष्पेंद्र पुत्र नरेन्द्र और मोहित पुत्र सहेंद्र को नामजद और दो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा कराया है। विकेंद्र की मां राजवीरी 2010 में जानी ब्लॉक प्रमुख रही है।
वारदात के बाद गांव में दहशत का माहौल है। परिवार के लोगों में कोहराम मचा हुआ है। देर रात पोस्टमार्टम के बाद विकेंद्र के शव का पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। विकेंद्र की हत्या के बाद गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है।
बाफर गांव में विकेंद्र व जितेंद्र के बीच अदावत चल रही थी। तीन साल पहले गांव में कार्यक्रम चल रहा था। जिसमें विकेंद्र और जितेंद्र की शर्त लगी थी, जितेंद्र जीत गया था।
पुलिस के मुताबिक इसके चलते विकेंद्र ने उसकी हत्या कर दी। जितेंद्र की हत्या में विकेंद्र और उसके तीनों भाई कवीन्द्र, छंगा उर्फ नरेन्द्र व लोकेन्द्र उर्फ भूरा जेल गए थे। डेढ़ साल पहले विकेंद्र जेल से जमानत पर छूटकर आ गया था।
जितेंद्र के बेटे विशाल और सागर अपने पिता की हत्या का बदला लेना चाहते थे, लेकिन विकेंद्र शातिर था। इसकी जानकारी जितेंद्र के बेटों को थी। उसके बाद ही उन्होंने विकेंद्र को मारने के लिए फुलप्रूफ योजना तैयार की और भाड़े के दो बदमाशों को सुपारी दी। दोनों बदमाशों ने विकेंद्र से पहले दोस्ती की।
पुलिस ने बताया कि जिन बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया, वह विकेंद्र के घर पर आते थे। विकेंद्र के घर दो-तीन बार खाना भी खाया है। दोनों बदमाश जितेंद्र के बेटों के संपर्क में थे या हत्या की कोई दूसरी वजह भी है, पुलिस इसकी जांच कर रही है। विकेंद्र जेल से छूटने के बाद किस-किस से बात करता था, इसकी सारी जानकारी पुलिस जुटाने में लग गई है।