उत्तर प्रदेश 112 आपात सेवा बेहद कम समय में एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर चुकी है। इस व्यवस्था को तकनीक तो खास बनाती ही है, साथ ही जवानों को दी गई व्यवहारिक ज्ञान की ट्रेनिंग भी बेहद काम आती है। इस ट्रेनिंग में जवानों को हर परिस्थिति से निपटने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जाता है।
उत्तर प्रदेश 112 आपात सेवा: हर परिस्थिति से निपटने के लिए यहां मानसिक रूप से तैयार होते हैं जवान
यूपी 112 के 18 दिन के फ्रेशर कोर्स की शुरुआत तकनीकी ज्ञान से होती है। शिकायत किस तरह लखनऊ मुख्यालय तक पहुंचती है और उसे कैसे जनपद में मौजूद डिस्पैच अफसर के जरिये पीआरवी (पुलिस रेस्पॉन्स व्हीकल) तक पहुंचाया जाता है, इसकी पूरी जानकारी दी जाती है।
इसके अलावा रिस्पंस टाइम से लेकर इवेंट क्लोजर तक की पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाता है। जवानों में आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए हर वर्ष रिफ्रेश कोर्स भी कराया जाता है।
संवाद है महत्वपूर्ण
पीआरवी पर तैनात स्टाफ के लिए सबसे महत्वपूर्ण संवाद और उसका व्यवहार है। पीड़ित अपना दर्द बयां कर सके और स्टाफ को उसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, इसका भी प्रशिक्षण फ्रेशर कोर्स में दिया जाता है।
इसमें महिला, बुजुर्ग और बच्चों से संवाद का तरीका भी सिखाया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि जरूरत पड़ने पर क्षेत्रीय लोगों की मदद भी ले सकते हैं।
यह होता है रिस्पॉन्स टाइम
काल डिस्पैच से घटनास्थल तक पहुंचने को रस्पॉन्स टाइम कहा जाता है। इवेंट क्लोजर सिस्टम अंतिम प्रक्रिया कहलाती है, जिसमें घटना स्थल पर पहुंचने वाली पीआरवी के पुलिसकर्मी थाने तक की कार्रवाई का निष्कर्ष मुख्यालय में दर्ज कराते हैं।
प्राथमिक उपचार का भी जिक्र
प्रशिक्षण के दौरान हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को तैयार किया जाता है। कभी-कभी हालात को देखते हुए पुलिसकर्मियों को पीड़ित को प्राथमिक उपचार भी देना पड़ जाता है।
ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान बताया जाता है कि पीड़ित की हालत के अनुसार ही उसे प्राथमिक उपचार देना चाहिए और फिर तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। सर्पदंश पर क्या करना चाहिए, यह जानकारी भी प्रशिक्षण में दी जाती है।