फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

दर्द सहा, जख्म खाए, तब पदक पाए..., मां-बाप की जुबानी यूपी के शूटर शार्दूल के संघर्ष की कहानी

Tue, 11 Sep 2018 02:01 PM IST
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 11 Sep 2018 02:01 PM IST
विज्ञापन
UP shooter Shardul vihan got medal after pain wounds and relief, story of the struggle
शूटर शार्दूल विहान - फोटो : अमर उजाला

नाम शार्दूल विहान, उम्र 15 वर्ष लेकिन एशियाड गेम्स की डबल ट्रैप व्यक्तिगत निशानेबाजी में रजत और कोरिया में टीम इवेंट में कांस्य पदक जीतने की उपलब्धि अपने नाम की। यूपी के मेरठ में रहने वाले इस शूटर ने छोटी उम्र में जितनी उपलब्धि बड़ी है, उतनी ही बड़ी इसके पीछे की कहानी है।  साढ़े छह किलो की बंदूक से निरंतर अभ्यास के दौरान कांधे में दर्द सहा, जख्म खाए और तब देश के लिए पदक जीतकर लाए। शार्दूल खुद को कुंदन की तरह तपा रहे हैं। उनकी सारी परेशानियां और कठिन तपस्या लक्ष्य के लिए हैं। किशोरावस्था में भारी बंदूक साधना बेहद चुनौतीपूर्ण है। लेकिन वह इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए अभ्यास से लेकर मुकाबले तक हमेशा तैयार हैं। उनके पेरेंट्स से जानते हें उनके सघर्ष की कहानी :-

कड़ी मेहनत की 

UP shooter Shardul vihan got medal after pain wounds and relief, story of the struggle
शार्दुल विहान
शार्दूल विहान के पिता दीपक विहान बताते हैं कि उनके बेटे ने कम उम्र से ही कड़ी मेहनत की। प्रैक्टिस के दौरान शार्दूल के कंधे पर नीले निशान पड़ गए, लेकिन दर्द को सहन कर उन्होंने प्रैक्टिस में कभी कोताही नहीं बरती। लगातार प्रैक्टिस के बाद दर्द कंधे से शुरू होकर पूरे शरीर में दौड़ता था। नीले निशान कई बार घाव भी बने और सोते समय करवट लेने में भी दिक्कत हुई। लेकिन इस दर्द को अभ्यास पर हावी नहीं होने दिया।  वे बताते हैं कि सुबह चार बजे प्रैक्टिस के लिए दिल्ली का सफर करना और फिर शाम को शार्दूल घर लौटता था। 

सो नहीं पाती थी मां

UP shooter Shardul vihan got medal after pain wounds and relief, story of the struggle
शार्दूल विहान के लिए रसगुल्ले बनातीं मां व मॉसी - फोटो : अमर उजाला

शार्दूल की मां मंजू बताती हैं कि वह जब रात में दर्द से कराहता था तो वे सो नहीं पाती थीं। कई बार रात में उठकर उससे पूछती थी कि बेटा दर्द अधिक तो नहीं है? लेकिन हर बार एक ही जवाब, नहीं मम्मी आप सो जाओ, मैं ठीक हूं। बेटे की उपलब्धि पर मां-बाप ही नहीं पूरे गांव को आज गर्व है। उसने न केवल अपने और अपने परिजनों का बल्कि प्रदेश और देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया है। शार्दूल विहान ने अमर उजाला से कहा कि जब गोली निकलती है तो झटका लगता है, जिस कारण से जख्म हो जाते हैं और दर्द भी बढ़ जाता है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

सरकार से नहीं मिली बधाई  

UP shooter Shardul vihan got medal after pain wounds and relief, story of the struggle
शार्दूल विहान को सम्मानित करते सांसद संजीव बालियान - फोटो : अमर उजाला

दीपक विहान ने बताया कि अभी सरकार की ओर से कोई बधाई या सहायता नहीं मिली है। जबकि हरियाणा सरकार में खिलाडि़यों को सरकार प्रोत्साहन देती है। सांसद डा. संजीव बालियान और भाजपा विधायक जितेंद्र सतवाई ने कहा है कि वे इस संबध में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से मिलकर हरियाणा की तरह से ही सहायता राशि दिलाएंगे।

विज्ञापन

कोच और भाई को श्रेय

UP shooter Shardul vihan got medal after pain wounds and relief, story of the struggle
शार्दुल विहान

शार्दूल के पिता दीपक विहान ने शार्दूल के कोच अर्जुन अवार्डी, अपने छोटे भाई मनोज विहान और धर्मेद्र शर्मा को शार्दूल की कामयाबी पर बधाई दी है। अनवर सुल्तान और मनोज विहान द्वारा की गई मेहनत का ही यह फल है कि आज शार्दूल ने देश मेें नाम रोशन कर दिया है।     
 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed