पुलिस ट्रेनिंग में भले ही कई बदलाव हुए हैं। इसके चलते साइबर अपराध और कंप्यूटर गणना का प्रशिक्षण अलग से दिया जा रहा है। हालांकि शारीरिक प्रशिक्षण में पुलिस की परेड अंग्रेजी राज जैसी है।
UP police training: आज भी अंग्रेजी राज की तर्ज पर हो रही परेड, एक साल से घटकर छह माह हुआ प्रशिक्षण
बदलाव भी आए
एसपी लाइन/ट्रैफिक जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि पुलिस की ट्रेनिंग में कई बदलाव आए हैं। हालांकि शारीरिक प्रशिक्षण, बलवा ड्रिल, परेड सेल्यूट और सलामी आज भी अंग्रेजी राज के हैं। परेड, सेल्यूट और सलामी की ट्रेनिंग सिपाही से लेककर आईपीएस के लिए बराबर है।
घुड़सवार की ट्रेनिंग के अतिरिक्त अब मोटर व्हीकल की ट्रेनिंग दी जा रही है। इनके अतिरिक्त कंप्यूटर, साइबर अपराध महत्वपूर्ण होता जा रहा है। जवानों में फिटनेस पैदा करना, शारीरिक व मानसिक मजबूती, कठिन समय में उचित निर्णय लेने का प्रशिक्षण दिया जाता है। आज पीआर, साइबर क्राइम की ट्रेनिंग का पार्ट अहम हो गया है।
शारीरिक प्रशिक्षण के साथ संगठित अपराध, आर्थिक अपराध से निपटने के लिए प्रदेश पुलिस को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। फोरेंसिक प्रशिक्षण, कम्प्यूटर, दूरसंचार, आधुनिक शस्त्रों का प्रशिक्षण देकर निपुण बनाया जा रहा। यह ट्रेनिंग जीवन भर काम आती है। -अजय साहनी, एसएसपी
वर्दी पहनने का सपना पूरा हुआ
बीटेक कर चुके योगेश चौधरी का कहना है कि पढ़ाई करने के बाद कठिन परिश्रम किया। इसके बाद वर्दी पहनने का सपना पूरा हुआ। -योगेश
पहली भर्ती में ही चयन
बीटेक की पढ़ाई के बाद प्राइवेट कंपनी में जॉब की। परिवार की इच्छा थी कि पुलिस की नौकरी करूं। पहली ही भर्ती में चयन हो गया। -अम्बेश कुमार
वर्दी का लोग आज भी सम्मान करते हैं। एमए की पढ़ाई करने के बाद भर्ती देखी और सफलता मिली।-तेजप्रकाश
वर्दी पहनकर अच्छा लग रहा
शिक्षा पूरी करने के बाद पुलिस में भर्ती होने की तैयारी की। वर्दी पहनने का सपना पूरा हुआ तो अच्छा लग रहा है। -राहुल सिंह