चाऊमीन, पेटीज और अन्य फास्ट फूड के साथ जिस टोमेटो सॉस को हम खा रहे हैं, वह जहरीली है। यह सॉस कपड़े की छपाई के रंग, सिंथेटिक सिरका और सड़ी सब्जियों से बनती है। इसमें रंग के लिए खतरनाक केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है।
टोमेटो सॉस नहीं, कहीं आप भी तो नहीं खा रहे 'लाल जहर', ठेले से रेस्त्रां तक धड़ल्ले से हो रही सप्लाई
अमर उजाला की टीम लिसाड़ी गेट के हुमायूं नगर स्थित एक मकान में पहुंची। मकान बाहर से बंद था। किसी तरह गेट खुलवाया गया तो अंदर का नजारा हैरान कर देने वाला था। बड़े-बड़े बर्तनों में सॉस बनाई जा रही थी। केमिकल और सड़ी हुई सब्जियों से बदबू आ रही थी। आसपास इतनी गंदगी थी कि वहां खड़ा होना तक मुश्किल हो रहा था।
फैक्टरी में काम कर रहे कर्मचारी ने बताया कि प्रतिदिन 300 से 400 लीटर सॉस बनाई जाती है और शहर के हर हिस्से में सप्लाई की जाती है। यह सॉस 10 से 12 दिन में सड़ जाती है। इसीलिए सॉस बनाकर जल्दी से सप्लाई कर दी जाती है। दुकानों पर भी तुरंत खपा दी जाती है।
इनका होता है प्रयोग
सॉस बनाने के लिए प्रिजरवेटिव एसिटिक एसिड, सोडियम बेनजोएट, अरारोट आदि का प्रयोग होता है। साथ ही कुछ अन्य केमिकल भी डाले जाते हैं। फास्ट फूड विक्रेताओं के अनुसार, गर्मी में यह सॉस दस दिन और सर्दियों में 14 दिन तक चल जाता है। इसके बाद इसमें भयंकर बदबू आने लगती है। सॉस में नॉन परमिट कलर का प्रयोग होता है। इस रंग को ड्राइक्लीनर या रंगरेज प्रयोग करते हैं।
न लाइसेंस, न कोई मानक
इन फैक्टरी संचालकों के पास सॉस बनाने के लिए न तो कोई लाइसेंस है और न ही ये किसी मानक का पालन करते हैं। सड़ी सब्जियों को पीसकर उसमें लाल रंग मिलाया जाता है। अगर ग्रीन चिली सॉस बनाती है तो उसमें हरा रंग मिला दिया जाता है। जो एक बार इस सॉस को बनता हुआ देख ले, तो वह कभी इस सॉस को नहीं खाएगा।
नहीं होती कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है, जबकि शहर के हर कोने में सॉस की सप्लाई हो रही है। आज तक किसी ठेले से इसके सैंपल तक नहीं लिए गए हैं।