उत्तराखंड के कालसी-चकराता मार्ग पर कार खाई में गिरने से अकाल मौत का ग्रास बने तीनों दोस्तों के शव एक साथ सहारनपुर पहुंचे। शवों के पहुंचते ही कोहराम मच गया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मोहल्ले में शोक छा गया। परिजनों को बिलखते देख मौजूद हर किसी की आंख नम हो गईं। अगली स्लाइडों में तस्वीरों के साथ जानिए पूरा अपडेट-
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शव पहुंचते ही मचा कोहराम
- फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर में अमरदीप कॉलोनी में शाम लगभग साढ़े पांच बजे जैसे ही वीरेंद्र का शव एंबुलेंस से उसके घर पहुंचा तो पूरा मोहल्ला एकत्रित हो गया। पत्नी रचना शव को देखते ही चीख पड़ी और बेसुध सी हो गई। भतीजी, भतीजे शव को देखते ही बिलख पड़े। भाई प्रताप सिंह भी अपने भाई के शव से लिपट कर रो पड़े। वहां मौजूद हर किसी की आंख नम हो गई। वीरेंद्र के भाई प्रताप ने बताया कि वीरेंद्र हाल में ही देहरादून स्थित आईडीएफसी में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में नियुक्त हुआ था। वीरेंद्र का चार साल पूर्व ही विवाह हुआ था। उसके तीन साल का एक बेटा है।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
यही हाल गोविंद विहार में डॉक्टर जगपाल त्यागी के घर का था। जगपाल त्यागी के बेटे गौरव त्यागी की लगभग ढाई साल पहले ही शादी हुई थी। उसकी एक साल की बेटी है। गौरव के घर में शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। गौरव त्यागी अपने परिवार का इकलौता पुत्र था। उसकी एक बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है। पिता डॉक्टर जगपाल त्यागी एक ओर बैठे अपने बेटे के शव को देख रहे थे। उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
नानक विहार में चार माह पूर्व ही मकान बनाकर रहने के लिए गया था दीपक तोमर। दोपहर तक तो उसकी पत्नी को हादसे के बारे में बताया ही नहीं गया। लेकिन जैसे ही शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। दीपक के तीन साल का बेटा और एक साल की बेटी है। महिलाएं उसकी पत्नी को संभालने का प्रयास कर रहीं थीं।
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मृतक दीपक तोमर का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
घर से काम के सिलसिले में जाने की बात कहकर गए थे
गौरव त्यागी के पिता डॉक्टर जगपाल त्यागी ने बताया कि गौरव के घर से निकलने के कुछ देर बाद ही वह घर पहुंचे थे। उन्होंने घर पर पूछा तो उन्हें बताया कि गौरव, दीपक और वीरेंद्र के साथ कुछ काम से गया है। दोनों उसके दोस्त थे। एक दिन बाद आने की बात कही थी। उन्होंने उस पर भरोसा कर लिया।