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बेबसी: पिता को बचाने के लिए भकटती रहीं बेटी, नहीं मिला इलाज, आखिर टूट गईं सांसें

Wed, 05 May 2021 08:20 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 05 May 2021 08:20 PM IST
सार

पिता की सासें अटक रही थी। उन्हें फौरन इलाज चाहिए था। पिता को बचाने के लिए बेटी परिजनों के साथ एंबुलेंस में लेकर शहर के अस्पतालों के बाहर भटकती रहीं। 

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The daughter is wandering for treatment of her father in many hospital but died from corona at Meerut
मेरठ में ऑक्सीजन की किल्लत। - फोटो : amar ujala

पिता की सासें अटक रही थी। उन्हें फौरन इलाज चाहिए था। पिता को बचाने के लिए बेटी परिजनों के साथ एंबुलेंस में लेकर शहर के अस्पतालों के बाहर भटकती रहीं। प्रशासनिक अफसरों को फोन करती रहीं। मुख्यमंत्री कोविड हेल्प लाइन  मिला- मिलाकर  थक गईं। मगर अफसोस दो दिन तक भटकने के बाद भी वो जिंदगी से जूझते पिता को बेड नहीं दिला पाईं। बीमार सांसे कब तक साथ देती। पिता दुनिया से चले गए। पूरे परिवार को ताउम्र का मलाल दे गए कि इलाज मिलता तो शायद बच जाते।

The daughter is wandering for treatment of her father in many hospital but died from corona at Meerut
मेरठ में ऑक्सीजन की कमी से अस्पतालों में हाहाकार। - फोटो : amar ujala

पल्लवपुरम के बीआर चौहान की इलाज नहीं मिलने पर सोमवार रात मौत हो गई। उनकी बेटी अंजली बताती हैं कि भैया और हम शनिवार रात से रविवार शाम तक पापा को एंबुलेंस में लेकर भटकते रहे। सुधा नर्सिंग होम, आर्य व्रत एसडीएस ग्लोबल और आईआईएमटी सहित ना जाने कहां-कहां नहीं गए, लेकिन हर जगह से मना कर दिया गया।

The daughter is wandering for treatment of her father in many hospital but died from corona at Meerut
अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी। - फोटो : amar ujala

एडीएम को फोन कर भर्ती कराने की मिन्नत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जब कहीं जगह नहीं मिली तो घर ले आए। रविवार रात में उनकी मौत हो गई। भर्राय गले से वह बताती हैं कि इलाज में ही लापरवाही नहीं हुई उनकी कोविड-19 रिपोर्ट भी आज तक नहीं मिली। एंटीजन जांच में पॉजिटिव आने के बाद आरटीपीसार भी कराई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट नहीं दी गई। निजी लैब में जांच कराने को कहा तो बोल दिया कि किट नहीं है।

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The daughter is wandering for treatment of her father in many hospital but died from corona at Meerut
अपने ऑक्सीजन के साथ भर्ती हो रहे मरीज। - फोटो : amar ujala

ऐसे तो सड़कों पर मर जाएंगे मरीज
कोरोना मरीजों को बेड नहीं मिलने की यह हकीकत रोज सामने आ रही है लेकिन, अफसर आंखें मूंदे हुए हैं जब हालात इतने खराब हैं तो अस्पतालों में बेड की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है। विकास तेवतिया ने बताया कि भाई को कोरोना वायरस है। हालत बिगड़ सकती है मंगलवार दोपहर से भर्ती कराने को अस्पतालों में बात करके थक गए हैं लेकिन, कहीं से भी जवाब नहीं मिला। विकास अपने ससुर को सोमवार दोपहर से भर्ती कराने के लिए बेड की तलाश कर रहे हैं लेकिन, हर जगह से सॉरी नो सुनने को मिल रहा है।

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ऑक्सीजन के लिए मची मारामारी। - फोटो : amar ujala

बस परिजन बोल रहे, लोगों को मरने के लिए छोड़ दो
मरीजों को भर्ती नहीं करा पाने वाले परिजनों के धैर्य का सब्र जवाब दे रहा है। वह कह रहे हैं कि अगर इलाज भी नहीं दिला सकते तो मरने के लिए छोड़ दो। एक बेड तक की व्यवस्था नहीं हो रही है तो क्या उम्मीद रखें पूरी मेडिकल व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।

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