सहारनपुर हादसे ने सोना सैयद माजरा निवासी महेंद्र सैनी को ऐसे जख्म दे दिया जो ताउम्र भरने वाले नहीं हैं। एक ही पल में उनका भरा पूरा परिवार उजड़ गया। पत्नी, बेटे, बेटी, दामाद, दो साल का मासूम नाती, साली के बेटे और समधी को खो चुका महेंद्र हादसे के बाद बदहवास है। नाते रिश्तेदार उसे सांत्वना देने पहुंच रहे हैं, लेकिन वह जैसे अपनी सुध बुध खो चुके हैं।
परिवार के सभी सदस्य शुक्रवार सुबह नौ बजे घर से निकले थे। कुछ ही देर में मनहूस खबर मिली कि उनकी कार बजरी से लदे डंपर के नीचे दब गई है। वह सिर पकड़ कर नीचे बैठ गए। पड़ोसियों ने किसी तरह संभाला।
2 of 18
हादसे में क्षतिग्रस्त कार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कुछ उम्मीद थी कि शायद कोई चमत्कार हो गए, लेकिन करीब एक घंटे बाद जब कार से डंपर और बजरी हटी तो सभी जिंदगियां थम चुकी थीं। शवों को देख एकबारगी राह चलते लोगों की भी चीख निकल गई। इनमें चार को जिला अस्पताल सहारनपुर और अनिरुद्ध सहित तीन को फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। वहां से इन तीनों की मौत की पुष्टि होने पर इन्हें भी जिला अस्पताल भेज दिया गया। हादसे के बाद उनके घर सांत्वना देने वालों का तांता लगा था।
3 of 18
एकसप्रेसवे पर ओवरब्रिज के पास पलट गया डंपर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
संदीप सोना बस स्टैंड पर मेडिकल स्टोर चलाते थे, जबकि उनका बड़ा भाई प्रदीप किसी कंपनी में नौकरी करता है। संदीप हंसमुख मिजाज थे। अभी उनकी शादी नहीं हुई थी। बड़े भाई प्रदीप की पिछले साल शादी हुई थी। जिस पंच कार में हादसा हुआ वह प्रदीप को दहेज में मिली थी। हादसे में प्रदीप के ससुर उमेश की भी मौत हो गई।
4 of 18
गांव सोना सैयद माजरा में अपने घर पर गमजदा महेंद्र सैनी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऐसा दिन देखना पड़ेगा, कभी नहीं सोचा था : महेंद्र
परिवार के सात सदस्यों को खोने वाले महेंद्र सैनी हादसे के बाद से गुमसुम हैं। ग्रामीण उन्हें सांत्वना देने आ रहे हैं, लेकिन उन्हें जैसे कुछ होश ही नहीं है। लोगों ने ढांढस बंधाया तो सिसक पड़े। काफी देर तक रोते रहे फिर बोले मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई, जिस वक्त घर से पत्नी, बेटा, बेटी और मासूम नाती निकले थे सपने में भी नहीं सोचा था कि वह उन्हें आखिरी बार देख रहे हैं।
5 of 18
संदीप सैनी का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हम उम्र साले की मौत से पहले ही दुखी थे कि कुदरत ने ऐसा जख्म दे दिया जो आखिरी सांस तक नहीं भरेगा। बेटी दामाद दोनों असमय चले गए अब बचे नाती अभिनंदन का क्या होगा। वह तो पांच साल का ही है। बिन मां बाप का बच्चा कैसे पलेगा। उसे तो पता भी नहीं होगा कि उसके मां बाप दोनों ही चल बसे हैं।