पुलिस-प्रशासन और आबकारी विभाग के दावों में जहरीली शराब कांड की जांच उलझती नजर आ रही है। शराब में जहर मिलाया गया या कच्ची शराब पीने से लोगों की मौत हुई, इसकी कोई पुष्टि करने को तैयार नहीं। दोनों विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। खुफिया विभाग ने दोनों विभागों की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। सहारनपुर में अब तक जहरीली शराब पीने से 82 लोगों की मौत हो चुकी है।
जहरीली शराब कांड: कैसे खुलेगा 82 मौतों का राज, जांच से पहले आमने- सामने आए ये बड़े विभाग
सबके दावे अलग-अलग
पुलिस प्रशासन का दावा है कि शराब में जहरीला पदार्थ मिलाया गया, या फिर शराब का स्वाद तीखा करने के लिए मीठा जहर मिलाया गया, जोकि जानबूझकर तेरहवीं में लोगों को बांटी गई। यह साजिशन वारदात हो सकती है, जिसकी जांच चल रही है। जबकि आबकारी विभाग के अधिकारी दावा करते कि अवैध तरीके से बनाई जा रही कच्ची शराब बांटी गई, जिसको पीने से लोगों की मौत हुई है। कच्ची शराब में इथाइल और मिथाइल की मात्रा कितनी प्रयोग करनी है, यह शायद कच्ची शराब बनाने वालों को नहीं पता था। यह वजह भी हो सकती है।
वहीं, मेडिकल अस्पताल के डॉक्टर कहते हैं कि शराब जहरीली थी, जिसको पीकर लोगों को सांस लेने में दिक्कत और दम घुटने जैसी शिकायत आ रही थी। ब्लड में जहरीली शराब मिल चुकी थी, जिसके चलते उनकी मौत हुई है।
कैसे खुलेगा मौतों का राज
सवाल बड़ा है कि आखिर शराब में क्या था, जिसने भी पी ली, उसको ही मौत ने आगोश में ले लिया। साजिश थी या कोई और वजह। इसका खुलासा पुलिस प्रशासन या फिर आबकारी विभाग को ही करना चाहिए था। लेकिन दोनो विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से हटकर दूसरों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। अब मौतों के बाद कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ प्रदेश भर में अभियान चलाया गया। पुलिस शराब की भट्ठियां तोड़ रही है।
एक-दूसरे पर फोड़ा ठीकरा
खुफिया विभाग ने सहारनपुर पुलिस-प्रशासन और आबकारी विभाग की रिपोर्ट का हवाला देकर शासन को रिपोर्ट भेज दी है। इसमें कहा कि दोनों विभाग एक-दूसरे पर लापरवाही बरतने का ठीकरा फोड़ रहे हैं। शराब को किसने बांटा व कहां तैयार हुई, इसका कोई जिक्र अभी दोनों विभागों की रिपोर्ट में नहीं है। इस मामले की जांच दूसरी एजेंसियों से कराई जानी चाहिए। ताकि स्पष्ट हो कि आखिर शराब में क्या था।
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