रूस यूक्रेन जंग के बीच यूक्रेन में रह रहे भारतीय दहशत में हैं और हर हाल में देश लौटना चाहते हैं। यूक्रेन सरकार के इमरजेंसी लगाने के बाद यूक्रेन में रहने वाले भारतीय स्वदेश लौटने के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट भी पकड़ रहे हैं। बॉर्डर वाले शहरों में रूसी सेना घुसने से डर का माहौल बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के यूक्रेन में रहने वाले लोगों ने तस्वीरों के साथ वहां के हालात बयां किए।
रूस ने गुरुवार को यूक्रेन पर हमला बोल दिया। मेरठ के कई छात्र यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं, हमले के बाद वे वहां फंस गए हैं। शहर के मलियाना निवासी उपन्यासकार विनोद प्रभाकर के बेटे प्रियांशु प्रभाकर का 25 फरवरी का टिकट था, लेकिन यूक्रेन में एयरपोर्ट खाली करा लिए गए। जिससे प्रियांशु के भारत आने की उम्मीद को झटका लगा है।
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प्रियांशु व मेरठ में उनका परिवार बाएं
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प्रियांशु लगातार फोन पर परिजनों के संपर्क में हैं। प्रियांशु ने परिजनों को बताया सभी भारतीय छात्रों को यूनिवर्सिटी कैंपस में एकत्रित कर लिया गया है, जबकि कैंपस के ऊपर से रूस के लड़ाकू विमान गुजर रहे हैं। हालांकि रूस के हमले का केंद्र सेना है, जिससे वह सुरक्षित हैं। लेकिन खतरा पुरी तरह बना हुआ है। तीन दिन ये युद्ध चलने की आशंका लग रही है।
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बागपत निवासी अक्षत त्यागी।
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बागपत के सुभानपुर गांव के रहने वाले अक्षत त्यागी पुत्र संजय त्यागी का यूक्रेन के शहर क्रिवोग्राड, वहां की राजधानी कीव व अन्य शहरों में कपड़े का व्यवसाय है। वहीं रमाला के निवासी पंकज वहां के ओडिसा में रहकर ट्रेडिंग का व्यवसाय करते हैं।
बागपत के मेरठ रोड निवासी ओमबीर ढाका की बेटी अनुष्का ढाका के साथ ही हरियाणा के करनाल व गुरुग्राम की कई छात्राएं एमबीबीएस कर रही हैं।
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यूक्रेन में भारतीयों की सलामती के लिए प्रार्थना करता परिवार
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अक्षत त्यागी ने क्रिवोग्राड व कीव के मॉल व सड़कों की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि जिस तरह से रूस की सेना यूक्रेन के कई शहरों के अंदर घुस गई हैं, उससे सभी जगह डर का माहौल है। इसलिए वहां रहने वाले अधिकतर भारतीय अपने देश लौटना चाहते हैं और वे फ्लाइट की व्यवस्था में लगे हैं। यदि सीधी फ्लाइट नहीं मिल रही है तो वे कनेक्टिंग फ्लाइट के सहारे लौटना चाहते हैं।
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यूक्रेन में बेटी से बात करती मां
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अक्षत त्यागी ने बताया कि लोगों ने हालात को देखते हुए खाद्य सामग्री जमा करनी शुरू कर दी है। मॉल व बाजार में सामान खरीदने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। अक्षत ने खुद भी दो महीने के लिए खाद्य सामग्री जमा की। जिससे अंदर के शहरों तक कोई परेशानी होती है, तो वे गुजर-बसर कर सकें।