राजनीतिक, जातीय और सांप्रदायिक रूप से अतिसंवेदनशील वेस्ट यूपी के शामली जिले में संघ प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत का तीन दिन प्रवास सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्षी दल इस प्रवास पर मंथन करने में जुटे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक के इस समय मेरठ और हापुड़ में प्रथम वर्ष के प्रशिक्षण वर्ग लगे हैं। हापुड़ में 15-40 वर्ष तो मेरठ में 40-60 वर्ष आयु के बीच के चिकित्सक, इंजीनियर, उद्यमी, व्यापारी, अधिवक्ता, सीए आदि प्रशिक्षण ले रहे हैं।
संघ प्रमुख का पश्चिमी यूपी में प्रवास, दलों में सियासी हलचल शुरू, इन मायनों में है खास
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इन मायनों में विशेष
संघ प्रमुख का यह प्रवास विशेष माना जा रहा है। विगत डेढ़ दशक में संघ की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। शाखाओं का विस्तार हुआ है। वेस्ट में भी संघ ने तेजी से जड़ें मजबूत की हैं। लेकिन इस दौरान संघ प्रमुख का दौरा और प्रवास मेरठ तक ही सीमित रहा। मेरठ में वह पांच बार आए और प्रवास किया। ऐसे में शामली जैसे छोटे जिले में उनके प्रवास को संघ नेता जहां सामान्य प्रवास बता रहे हैं, तो राजनीतिक दल अपने मायने निकाल रहे हैं।
जीत से संतुष्ट नहीं संघ परिवार
जागृति विहार में फरवरी 2018 में एक दिवसीय राष्ट्रोदय कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने शाखाओं का विस्तार करने के साथ ही दलितों और अति पिछड़ाें को साथ जोड़ने की बात कही थी। हालांकि इस कवायद को वेस्ट यूपी में 2 अप्रैल को हुए दलित आंदोलन से तगड़ा झटका लगा था। जिसका प्रमाण उपचुनावों और लोकसभा चुनाव में साफ नजर आया। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां जीत जरूर हासिल की। लेकिन जितने कम अंतर से जीत मिली, उससे संघ परिवार संतुष्ट नहीं है। क्योंकि विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
लेकिन लक्ष्य नहीं छोड़ा
लेकिन संघ ने अपने इस लक्ष्य को नहीं छोड़ा है। बल्कि अब इसमें कई अन्य लक्ष्य भी शामिल कर लिए हैं। संघ प्रमुख के तीन दिनी प्रवास को लेकर चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में वेस्ट की गाजियाबाद सीट को छोड़ दें तो बाकी सीटों पर हिंदू वोट जातीय समीकरण में बिखरा नजर आया। जबकि मुस्लिम और दलित एकजुट रहे। आगे चुनावों में भी यदि यही समीकरण रहा तो गठबंधन यूपी के भीतर भाजपा की राह में बड़ी बाधा बन सकता है।
और अब रणनीति तैयार
इसी को देखते हुए अब संघ ने रणनीति तैयार की है। इसके तहत शाखा का विस्तार न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक करने का है। ताकि प्रत्येक गांव में एक शाखा जरूर लगे और वहां स्वयंसेवक तैयार हो सकें। साथ ही सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए जातीय समीकरण साधने की कवायद फिर से शुरू होगी। जिसके तहत पिछड़ा, अति पिछड़ा और अनुसूचित जाति के लोगों को संघ की विचारधारा से जोड़ने का अभियान चलेगा।
संघ सूत्रों की मानें तो द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षण वर्ग में 17-40 वर्ष के विशेष चयनित 155 स्वयंसेवक शामिल रहे। ये वो स्वयंसेवक हैं जो लगभग पूर्णकालिक रूप से काम करेंगे। शाखाओं के विस्तार के साथ संघ की सोच आगे बढ़ाते हुए मिशन पर काम करेंगे। इन्हीं स्वयंसेवकों के बीच रहकर संघ प्रमुख ने सीधा संवाद किया।