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बसपा के गढ़ में 'भीम आर्मी' का अहम रोल, मायावती को इन वजहों से मिल सकता है 2019 में फायदा

Tue, 18 Sep 2018 05:45 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Updated Tue, 18 Sep 2018 05:45 PM IST
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Role of 'Bhim Army' in BSP's stronghold, Mayawati can benefit in the 2019 Lok Sabha elections
फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश में बसपा के गढ़ माने जाने वाले जनपद में भीम आर्मी का 2019 के लोकसभा चुनाव में क्या रोल रहेगा और उससे मायावती को कैसे फायदा मिल सकता है। यह हम आपको अगली स्लाइड में बताएंगे।

Role of 'Bhim Army' in BSP's stronghold, Mayawati can benefit in the 2019 Lok Sabha elections
चंद्रशेखर व मायावती। - फोटो : amar ujala

आपको बता दें कि भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर दलित समाज से आते हैं। खास बात यह है कि चंद्रशेखर की जेल से रिहाई के बाद दलितों में एक अलग उत्साह है। पश्चिमी यूपी में अधिक संख्या में दलित युवा चंद्रशेखर के साथ हैं। इससे साफ है कि अगर चंद्रशेखर 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा को सपोर्ट करेंगे तो उसका फायदा मायावती को मिलेगा। आगे जानिए बसपा के गढ़ में मायावती की जीत का रिकॉर्ड:-

Role of 'Bhim Army' in BSP's stronghold, Mayawati can benefit in the 2019 Lok Sabha elections
बसपा सुप्रीमो मायावती - फोटो : amar ujala

यूपी के सहारनपुर जिले में बरसों से दलित राजनीति का गढ़ रहा है। बसपा प्रमुख रहे कांशीराम और मायावती भी यहां से चुनाव लड़ चुकी हैं।

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Role of 'Bhim Army' in BSP's stronghold, Mayawati can benefit in the 2019 Lok Sabha elections
मायावती - फोटो : amar ujala

बहन जी यहां से जीत कर ही पहली बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थी। जिले में करीब सात लाख अनुसूचित जाति के मतदाता है, जिनका झुकाव चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की ताकत रखता है।

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Role of 'Bhim Army' in BSP's stronghold, Mayawati can benefit in the 2019 Lok Sabha elections
चंद्रशेखर ऊर्फ रावण - फोटो : अमर उजाला

बसपा के बाद अब भीम आर्मी नई ताकत के रूप में सामने आई है। भीम आर्मी प्रमुख अनुसूचित जाति के मतदाताओं के अलावा मुस्लिम और ओबीसी की गोलबंदी में लग गए हैं, ताकि 2019 के चुनाव में अपनी राजनीतिक शक्ति का लोहा मनवा सके। करीब 38 लाख की आबादी वाले जिले से सहारनपुर और कैराना लोकसभा से जुड़ी हैं, जबकि सात विधानसभाएं है। इनमें नकुड़ और गंगोह कैराना संसदीय क्षेत्र में है। फिलहाल 26 लाख मतदाता है, मगर नए वोटरों के जुड़ने के कारण यह संख्या आगामी लोकसभा चुनाव में बढ़ने की उम्मीद हैं। जिले में बरसों से दलित राजनीति प्रभावी रही है।

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