उत्तर प्रदेश में बसपा के गढ़ माने जाने वाले जनपद में भीम आर्मी का 2019 के लोकसभा चुनाव में क्या रोल रहेगा और उससे मायावती को कैसे फायदा मिल सकता है। यह हम आपको अगली स्लाइड में बताएंगे।
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चंद्रशेखर व मायावती।
- फोटो : amar ujala
आपको बता दें कि भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर दलित समाज से आते हैं। खास बात यह है कि चंद्रशेखर की जेल से रिहाई के बाद दलितों में एक अलग उत्साह है। पश्चिमी यूपी में अधिक संख्या में दलित युवा चंद्रशेखर के साथ हैं। इससे साफ है कि अगर चंद्रशेखर 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा को सपोर्ट करेंगे तो उसका फायदा मायावती को मिलेगा। आगे जानिए बसपा के गढ़ में मायावती की जीत का रिकॉर्ड:-
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बसपा सुप्रीमो मायावती
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यूपी के सहारनपुर जिले में बरसों से दलित राजनीति का गढ़ रहा है। बसपा प्रमुख रहे कांशीराम और मायावती भी यहां से चुनाव लड़ चुकी हैं।
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मायावती
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बहन जी यहां से जीत कर ही पहली बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थी। जिले में करीब सात लाख अनुसूचित जाति के मतदाता है, जिनका झुकाव चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की ताकत रखता है।
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चंद्रशेखर ऊर्फ रावण
- फोटो : अमर उजाला
बसपा के बाद अब भीम आर्मी नई ताकत के रूप में सामने आई है। भीम आर्मी प्रमुख अनुसूचित जाति के मतदाताओं के अलावा मुस्लिम और ओबीसी की गोलबंदी में लग गए हैं, ताकि 2019 के चुनाव में अपनी राजनीतिक शक्ति का लोहा मनवा सके। करीब 38 लाख की आबादी वाले जिले से सहारनपुर और कैराना लोकसभा से जुड़ी हैं, जबकि सात विधानसभाएं है। इनमें नकुड़ और गंगोह कैराना संसदीय क्षेत्र में है। फिलहाल 26 लाख मतदाता है, मगर नए वोटरों के जुड़ने के कारण यह संख्या आगामी लोकसभा चुनाव में बढ़ने की उम्मीद हैं। जिले में बरसों से दलित राजनीति प्रभावी रही है।