वैवाहिक संबंधों में मामूली विवाद प्रतिष्ठा का मुद्दा बन रहे हैं। छोटे-छोटे कारणों में सात जन्मों के रिश्ते इस कदर उलझ रहे हैं कि नौबत परिवार टूटने की आ रही है। शिकायती पत्र में आरोप तो बहुत गंभीर लगाए जाते हैं। लेकिन परिवार परामर्श केंद्र (पीपीके) में काउंसिलिंग के दौरान अधिकांश केसों में सामने आता है कि मामला इतना बढ़ा नहीं था, जिसे इतना खींच दिया गया। सोमवार को पीपीके में कुछ ऐसे ही मामले सामने आए।
सास., समोसा और साड़ी में उलझे जन्मों के रिश्ते, मामूली विवाद बन रहे प्रतिष्ठा के मुद्दे, टूट रहे घर
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शामली निवासी एक युवक मेरठ में कांस्टेबल पद पर तैनात है। पांच साल पहले उसकी शादी बुलंदशहर निवासी युवती से हुई थी। बहू पढ़ना चाहती है। लेकिन सास पढ़ाने से मना करती है।
दंपती की काउंसिलिंग में सामने आया कि विवाहिता ने ने पति से समोसे मंगा लिए थे और यह बात सास को पसंद नहीं आई। इसी पर कहासुनी हुई और बात इतनी बढ़ी कि विवाहिता मायके चली गई। अब विवाहिता ने कहा कि वह मेरठ में ही पति के साथ रहेगी, ससुराल में नहीं रह सकती।
ननद के पैर नहीं छूने पर हुई नापसंद
परतापुर क्षेत्र निवासी युवती की शादी डेढ़ साल पहले कंकरखेड़ा निवासी युवक के साथ हुई थी। शादी के एक साल बाद विवाहिता ने ननद के पैर छूने से इनकार किया तो सास ने पैर छूने का दबाव बनाया।
वहीं, ससुराल वालों ने विवाहिता के फेसबुक चलाने पर भी रोक लगा दी। पीड़िता ने एसएसपी से शिकायत की। सोमवार को सास ने परिवार परामर्श केंद्र में कहा कि ससुराल में रहना है तो ननद के पैर छूने होंगे।
साड़ी ने रिश्ता तोड़ा
गंगानगर निवासी युवती एक कंपनी में इंजीनियर है। मई 2019 में उसकी शादी नौचंदी क्षेत्र में हुई थी। युवती ने दहेज का आरोप लगाकर शिकायत की थी।
काउंसिलिंग में सामने आया कि सास ससुराल में साड़ी पहनने का दबाव देती है। इसी के चलते दंपती में विवाद हुआ और तीन काउंसिलिंग में मामला नहीं निपटा। अब वधू पक्ष के लोगों ने दहेज का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।
एक माह में 201 मामले
पीपीके की प्रभारी मोनिका जिंदल का कहना है जनवरी माह में 201 मामले सामने आए। कुल 528 मामलों में सुनवाई की गई, जिनमें से 100 मामलों में समझौता हुआ।
98 कोर्ट चले गए और 20 में केस दर्ज कराया गया। 10 से 15 प्रतिशत मामलों में ही दहेज के आरोप सही पाए जा रहे हैं। छोटी सी बातों पर रिश्तों में दरार आ रही है। सोमवार को सात मामलों में समझौता भी कराया गया।