50 साल पहले ठेले पर नींबू बेचने वाला याकूब कुरैशी अरबपति बन गया। बसपा हो या सपा की सरकार, कभी उसका रुतबा कम नहीं हुआ। कभी विवादित बयान तो कभी अराजकता करके हमेशा सुर्खियों में रहा।
मेरठ जनपद में दंगा हो जाए या फिर बवाल। उसको शांत करने के लिए अधिकारियों को याकूब की याद आती थी। सलाखों में याकूब के पहुंचते ही उसका रुतबा खत्म होने की कगार पर जाता दिख रहा है।
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पुलिस हिरासत में याकूब कुरैशी और बेटा।
- फोटो : amar ujala
सन 2007-2012 में प्रदेश में बसपा सरकार की सरकार थी। बसपा सुप्रीमो मायावती (पूर्व मुख्यमंत्री) ने याकूब को मंत्री बना दिया। मंत्री रहते 17 फरवरी 2011 को याकूब ने सिपाही चहन सिंह बालियान को हापुड़ अड्डा चौराहे पर थप्पड़ मार दिया था। सिपाही का कसूर था कि रविदास जयंती पर निकल रही शोभायात्रा पर याकूब का काफिला रोक दिया था।
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याकूब से मिलने पहुंचे समर्थक।
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याकूब की गाड़ी को रूट डायवर्ट का हवाला देते हुए दूसरे रास्ते से जाने को कहा था, इसके बावजूद अपनी गाड़ी से वह उतरें। सिपाही चहन सिंह ने शोभायात्रा का जुलूस का हवाला दिया, जिस पर याकूब ने उनको थप्पड़ मार दिया था।
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हाजी याकूब कुरैशी व बेटा इमरान
- फोटो : अमर उजाला
इससे पहले सन 2006 में याकूब अपने बयान को लेकर चर्चा में आए थे। उन्होंने डेनमार्क के कार्टूनिस्ट का सिर कलम करने वाले को 51 करोड़ का इनाम देने की घोषणा की थी। याकूब पर भाजपा नेता सुनील भराला सहित तीन जिलों में मुकदमे दर्ज हुए हैं। बाद में पुलिस से सांठगांठ कर केस डायरी गायब करा दी।
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हाजी याकूब कुरैशी व बेटा इमरान
- फोटो : अमर उजाला
देहलीगेट थाना पुलिस अब दोबारा से केस डायरी तैयार कर कार्टूनिस्ट प्रकरण में चार्जशीट लगाने में जुटी है। वेस्ट एंड रोड स्थित एमपीएस में हंटर से पिटाई करने के मामले में 2017 में याकूब का परिवार भी चर्चा में आया था। इसके अलावा भी वह अपने विवादित बयान को लेकर कई बार सुखियों में आए है।