रैपिड रेल की सुरंग में पहली बार ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो गया है। गांधीबाग से लेकर बेगमपुल आरआरटीएस स्टेशन तक पहली टनल का निर्माण पिछले वर्ष अक्तूबर में सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया था। यह आरआरटीएस कॉरिडोर की पहली सुरंग है।
अब इसी 750 मीटर लंबी टनल के अंदर ट्रैक बिछाने की गतिविधि शुरू की गई है।
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रैपिड रेल की सुरंग
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मेरठ के शताब्दीनगर के कास्टिंग यार्ड की ट्रैक स्लैब फैक्टरी में प्रीकास्ट ट्रैक स्लैब का निर्माण किया जा रहा है। देश में पहली बार ऐसी तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिनसे उच्च क्षमता वाले बलास्टलैस ट्रैक स्लैब का उत्पादन हो रहा है। इनका जीवन काल लंबा होता है और इन्हें कम रखरखाव की आवश्यकता होती है।
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रैपिड रेल के पिलर
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एनसीआरटीसी के अफसरों ने बताया कि ये ट्रैक स्लैब आमतौर पर 4 मीटर x 2.4 मीटर आकार के होते हैं और इनके निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले कंक्रीट का उपयोग किया जाता है। इन ट्रैक स्लैब को ट्रकों-ट्रेलरों के जरिये टनल की साइट पर लाया जा रहा है और टनल के अंदर इंस्टॉल करने का कार्य शुरू किया गया है।
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रैपिड रेल
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गोलाकार टनल में ट्रैक को मजबूती देने के लिए सर्वप्रथम पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) का बेस बनाया जाता है। टनल के अंदर ट्रैक बिछाने की गतिविधियों के अंदर जहां-जहां जरूरत है, वहां विशेष प्रकार के रबर पैड भी इंस्टॉल किए जाते हैं, जो टनल के कंपन को नियंत्रित करने का कार्य करते हैं।
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रैपिड रेल के पिलर निर्माण का कार्य चल रहा है।
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ट्रैक स्लैब के बाद शुरू होगा सिग्नल सिस्टम
ट्रैक स्लैब के इंस्टॉल होने के बाद सिग्नल सिस्टम और ट्रैक्शन (ओएचई) लगाने की गतिविधियां शुरू की जाएंगी। इस ट्रैक तकनीक की मदद से एनसीआरटीसी हाई स्पीड और हाई फ्रीक्वेंसी आरआरटीएस ट्रेनें चलाने में सक्षम होगी और संचालन के दौरान क्रमशः 180 किमी प्रति घंटे और 100 किमी प्रति घंटे की औसत गति के साथ यात्रियों की सुरक्षा और आराम को सुनिश्चित करेगी।