यूपी के मेरठ जिले का किठौर क्षेत्र इन दिनों काफी चर्चाओं में हैं। इसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि यहां पकड़े गए कुछ ऐसे संदिग्ध हैं जिनका कनेक्शन आईएसआईएस से बताया जा रहा है। बीते दिनों 26 दिसंबर को इसी क्षेत्र के राधना गांव में नेशनल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी NIA ने संदिग्ध 'नईम' की तलाश में छापेमारी की जिसके बाद से ये गांव सुर्खियों में है।
जैसी डिमांड वैसा हथियार यहां हो जाता है तैयार, देखें आखिर क्यों बदनाम है यूपी का ये गांव
इससे पहले भी इस गांव में पुलिस अक्सर अवैध हथियार तस्करों की तलाश में दबिश देती रही है लेकिन आलम ये है कि यहां अवैध असलाह की कारीगरी और तस्करी का कारोबार लगातार जारी है।
आइए एक नजर डालते हैं आखिर क्यों बदनाम है ये गांव :-
कहा जाता है कि यदि कोई अपराधी अपराध करने के बाद इस गांव में पहुंच जाए तो समझा जाता है कि वह पुलिस की पकड़ से दूर है। ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस यहां दिन के उजाले में भी कदम रखने से डरती है और इसकी बड़ी वजह है कि यहां दबिश देने गई पुलिस पर अब तक न जाने कितनी ही बार हमले हो चुके हैं।
पुलिस जब भी इस गांव में दबिश के लिए पहुंचती है तो अपराधियों को इसकी भनक लग जाती है और वे फरार हो चुके होते हैं। यही कारण है कि पुलिस पहली बार में अक्सर यहां से खाली हाथ लौटती है। हाल ही में गिरफ्तार नईम को लेकर जब एनआईए राधना पहुंची तो उसके घर पर ताला लगा हुआ था और परिजन घर छोड़कर जा चुके थे। वहीं घर में तकरीबन एक दर्जन प्यालों में आधी आधी चाय मिली, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा था कि घरवालों को NIA के आने की सूचना पहले ही मिल चुकी थी।
अवैध हथियारों का गढ़ माना जाने वाला राधना यूपी सहित कई राज्यों में बदनाम है। यहां अवैध हथियारों को बनाने और बेचने का काम बड़े पैमाने पर किया जाता है वह भी पुलिस की नाक के नीचे। दरअसल, यहां गोपनीय रूप से खेतों और घरों में चलती हैं तमंचे बनाने की फैक्ट्री। आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये हथियार कैसे बनाए जाते हैं तो हम आपकों बता दे कि इस काले कारोबार को रात के अंधेरे में अंजाम दिया जाता है। सुदूर इलाकों के ईख के खेतों में कारीगर टॉर्च और एलईडी लाइटों की रोशनी में रातों रात अवैध हथियारों का जखीरा तैयार करते हैं।