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खाकी का नाकाम सिस्टम: आखिर क्यों आत्मदाह जैसा खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर हुआ मेरठ का व्यापारी

Thu, 18 Jul 2019 01:42 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 18 Jul 2019 01:42 PM IST
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Question on Police system, Why Meerut businessman forced to make self-destruction
यूपी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में स्पोर्ट्स व्यापारी रंजीत सिंह ने खाकी के नाकाम सिस्टम से हताश होकर बुधवार रात आत्मदाह जैसा खौफनाक कदम उठा लिया। इस सनसनीखेज घटना ने खाकी के उस चेहरे को सामने लाकर रख दिया है, जो थाने में फरियाद लेकर आने वालों को न्याय देने के बजाय उन्हें बेइज्जत करता है। आगे जानें आखिर क्यों व्यापारी ने सिस्टम से हारकर उठाया खौफनाक कदम -
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आत्मदाह की कोशिश - फोटो : अमर उजाला

पुलिस अफसर बड़े-बड़े दावे करते हैं कि थानों में हर व्यक्ति की सुनवाई होगी। एसएसपी ऑफिस पर प्रत्येक दिन औसतन 70 से 80 शिकायती पत्र पहुंचते हैं, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि थानों में पुलिस सुनवाई नहीं करती।

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व्यापारी के परिजन - फोटो : अमर उजाला

स्पोर्ट्स व्यापारी रंजीत सिंह ने दिसंबर 2018 में टीपीनगर थाने में पीएनबी शाखा मंडी गेट के मैनेजर और अन्य कर्मचारियों पर केस दर्ज कराया था। व्यापारी का आरोप है कि पुलिस उसे परेशान कर रही थी। जब भी वह थाने जाता तो कभी दरोगा नरेंद्र कुमार धमकाते तो कभी इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार गौतम धमकाते थे।


 
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अस्पताल में झुलसा व्यापारी - फोटो : अमर उजाला

आरोप है कि कई बार एसपी सिटी से भी शिकायत कर इंसाफ की गुहार लगाई। लेकिन उसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं की। बुधवार को भी पीड़ित व्यापारी इंस्पेक्टर टीपी नगर को कॉल करता रहा, लेकिन इंस्पेक्टर ने कार्रवाई तो दूर कॉल तक रिसीव नहीं की। 

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यूपी पुलिस - फोटो : अमर उजाला

व्यापारी नेता विपुल सिंघल का आरोप है कि थानेदार से लेकर पुलिस के उच्च अधिकारियों का फोन नहीं उठता। कई बार यह मामला मीटिंग में उठ चुका है। लेकिन उसके बाद भी पुलिस का बर्ताव ठीक नहीं है। थानेदार ही नहीं सीओ, एसपी सिटी और जिले के पुलिस अधिकारियों के भी मोबाइल नहीं उठते। 

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