हर तरफ मातम। सिसकियां। शहीद की मां चुप होती तो बहन के आंसुओं का सैलाब बहने लगता। उसको चुप कराते तो पत्नी चीत्कार करने लगती। हर किसी को बिलखता देख परिवार के मुखिया भी फफकने लग जाते। मुंह छिपाकर बस यही बुदबुदाते कि अजय तू तो चला गया। बच्चों का क्या होगा।
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शहीद अजय कुमार
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि 28 घंटे तक इस परिवार ने जो झेला वो कोई न समझ सकता। न महसूस कर सकता है। इकलौते लाल को खोने वाला ये परिवार कभी इस भरपाई को पूरा नहीं कर पाएगा।
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शहीद अजय कुमार
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अजय के बड़े होते बेटे के सवालों का जवाब नहीं दे पाएगा। अजय देश के लिए तो शहीद हो गए। लेकिन अपने परिवार को वे ताउम्र कभी न भरने वाला जख्म दे गए।
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शहीद अजय कुमार
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जानी का बसा टीकरी गांव कभी सुर्खियों में नहीं रहा। 720 लोगों की आबादी। बेहद शांत माहौल। लेकिन सोमवार सुबह 8:30 बजे यहां के निवासी सेना से रिटायर्ड वीरपाल सिंह के घर मनहूस खबर आई। जिसे सुनकर हर कोई सन्न रह गया। खबर थी कि जम्मू के पुलवामा में तैनात वीरपाल के बेटे अजय कुमार के आतंकियों के सर्च ऑपरेशन में शहीद होने की। जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया।
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शहीद अजय कुमार
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अजय की पांच माह की गर्भवती पत्नी प्रियंका बेसुध हो गईं। मां कमलेश और बहन अर्चना का बुरा हाल हो गया। पिता वीरपाल ने किसी तरह आंसू रोके। लेकिन बहू और पोते की हालत देखकर वे आंसुओं का सैलाब चाहकर भी रोक न सके। पूरा दिन सिसकियों-चीत्कार में बीता।