कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का धरने पर डटे हैं। वहीं पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन में जान फूंकने और सियासी जमीन पर पकड़ बनाने की कोशिशों में लगातार महापंचायतों को दौर जारी है।
पश्चिमी यूपी में प्रियंका गांधी की ताबड़तोड़ रैलियों ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किल, तस्वीरों में जानें सियासत का बदलता गणित
कृषि कानूनों के विरोध को आधार बनाकर एक तरफ आंदोलन के जरिए हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों को एकजुटता का पाठ तो पढ़ाया जा ही रहा है, वहीं किसान संगठन अपनी पकड़ मजबूत करने सियासी जमीन तलाशने की कोशिश में जुट गए हैं।
इसी बीच राजनीतिक पार्टियां भी माहौल भुनाने की कोशिश में जुटी हैं। इससे जाहिर है कि पश्चिमी यूपी में कहीं न कहीं सियासत का गणित बदलता नजर आ रहा है।
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आंदोलन के बीच किसान महापंचायतों से जहां भारतीय किसान यूनियन को अपनी खोई ताकत वापस मिली है तो वहीं रालोद भी अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है।
कांग्रेस किसानों की नव्ज भांपने की कोशिशों में जुट गई, तो आम आदमी पार्टी ने भी किसान पंचायत का आयोजन कर पश्चिमी यूपी की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी।
अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने अपने अभियान की शुरुआत पश्चिमी उत्तर प्रदेश से की है। ऐसे में वेस्ट यूपी के किसानों का दिल जीतने का जिम्मा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उठाया है।
वह अब तक वेस्ट यूपी में चार किसान महापंचायतों को संबोधित कर चुकी हैं। इन महापंचायतों की शुरूआत प्रियंका ने सहारनपुर के श्री शाकंभरी देवी मंदिर में पूजा-अर्चना से की थी।