भगवान श्रीराम का जन्म होते ही पंडाल श्रीराम के जयकारों से गूंज उठता है। राम के जन्म पर अयोध्या में खुशियां मनाई जाती हैं। नगरी के लोग नृत्य करते हे और मिठाइयां बांटते हैं। उधर जनक नगरी में जनता बारिश न होने पर राजा जनक से अपना दुखड़ा सुनाती है। जनक व्याकुल होकर मुनियों के साथ मंत्रणा करते है और रानी के साथ सोने का हल चलाते है। हल चलाते समय हल एक जगह आकर रुक जाता है। राजा के आदेश पर वहां खोदाई कराने पर एक घड़े में कन्या का जन्म होता है, जिसका नाम सीता रखा जाता है। ये बागपत में चल रही रामलीला के कुछ अंश हैं जिन्हें मंच पर कलाकार अलग अलग किरदारों के रूप में निभा रहे हैं। ये सभी किरदार जहां दिन में नौकरी, व्यापार या अन्य कार्य करते हैं वहीं रात को रामलीला के लिए अपना किरदार बदल लेते हैं। पढ़ें ये खबर।
Ramleela: दिन में हवन, रात में रावण बन जाते हैं नितिन, ईंट सप्लाई कर राम का किरदान निभाते हैं आशु
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ठाकुरद्वारा में रामलीला का 122 साल पुराना है इतिहास
बागपत नगर के ठाकुरद्वारा में श्री रघुवर रामलीला पिछले 122 साल से हो रही है। रामलीला के कलाकार जहां दिन में नौकरी और व्यापार करते हैं, तो वह रात में रामलीला में अपना किरदार निभाकर लोगों का मनोरंजन भी करते हैं।
श्री ठाकुरद्वारा मोहल्ले में रघुवर रामलीला समिति की ओर से प्रति वर्ष रामलीला का मंचन कराया जाता है। रामलीला में किरदार निभाने वाले रात नौ बजे से करीब 12 बजे तक अपने अभिनय से लोगों का मनोरंजन करके तालियां बटोरते हैं, तो दिन में अपना व्यापार और नौकरी करते हैं।
दिन में ईंटों की सप्लाई तो रात को बन जाते हैं राम
रामलीला में जनक का किरदार निभा रहे आशीष रूहेला दिल्ली रोड स्थित बाइक की एजेंसी में सर्विस एडवाइजर हैं, तो राम का किरदार निभा रहे आशु वर्मा ईंटों की सप्लाई करते हैं।
फोटो फ्रेमिंग का काम निपटाकर कौशल्या का रूप धरते हैं सुजीत
अपने तेज ठहाकों से रावण का दमदार अभिनय करने वाले नितिन स्वामी उर्फ काकू पेशे से ज्योतिषाचार्य है। गांधी बाजार में फोटो फ्रेमिंग की दुकान करने वाले सुजीत लखेरा रामलीला में कौशल्या का किरदार निभाते हैं, तो वह अंगद व लक्ष्मण का किरदार भी करते हैं।
चूड़ी की दुकान करते हैं रामलीला के सुमंत
रामलीला में सुमंत का अभिनय करने वाले सुभाष लखेरा का चूड़ी की दुकान है। दशरथ का अभिनय बिजेंद्र गौतम करते हैं, जो बागपत तहसील में टाइपिंग का कार्य करते हैं।