मेरठ के एमआईईटी कॉलेज में पढ़ने वाले गांव शिकोहपुर निवासी बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र निखिल तोमर की हत्या से परिवार में गम का माहौल है। पोस्टमार्टम के बाद उसका शव बुधवार रात को गांव लाया गया। शव को देखकर उसकी मां बेहोश हो गई। तबियत बिगड़ने पर उनका उपचार कराना पड़ा। भाई के बिछुड़ने पर बहन की आंखों से आंसू नहीं सूख रहे है। बुधवार की रात में ही गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार किया गया।
निखिल हत्याकांड: बेटे का शव देख बेहोश हो गई मां, बहन की आंखों से नहीं सूख रहे आंसू, देर रात हुआा अंतिम संस्कार
पुलिस के मुताबिक मोहित नाम के एक छात्र ने छात्रा पर फब्ती कसी और फिर छेड़छाड़ कर दी। तब अभिषेक शर्मा पक्ष के आदर्श ने मोहित को थप्पड़ मार दिया था। इसी के बाद से अभिषेक शर्मा और निखिल तोमर पक्ष के छात्रों के बीच वर्चस्व को लेकर जंग शुरू हो गई। इसके बाद कई बार दोनों गुटों में मारपीट हुई, बावजूद कॉलेज प्रशासन गंभीर नहीं हुआ।
मंगलवार सुबह फिर से दोनों गुटों के बीच कैंपस में मारपीट हुई। आरोप है कि निखिल ने आदर्श को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद अभिषेक, आदर्श और उसके साथियों ने निखिल की हत्या की योजना बना ली। बुधवार सुबह 9:55 बजे कैंपस में अभिषेक, आदर्श और उसके साथियों ने निखिल व उसके दोस्त आर्यन को घेर लिया।
मेरठ से पोस्टमार्टम के बाद बुधवार रात को करीब 11 बजे निखिल तोमर का शव शिकोहपुर गांव लाया गया। शव देखकर मां रेखा बेहोश हो गई, जिससे उनकी तबियत बिगड़ गई। भाई के शव को देखकर बहन शिवानी की आंखों से आंसू बहते रहे। निखिल का शव कुछ देर घर में रखने के बाद गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
उधर, शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए गुरुवार सुबह से ग्रामीण उनके घर पहुंचने लगे। पिता पुष्पेंद्र उर्फ पप्पू ने बताया कि पेपर खत्म होने के बाद निखिल कुछ दिनों के लिए घर आया था। उसके आने से घर में खुश का माहौल बना हुआ था। वह आठ अप्रैल को वापस मेरठ चला गया था। उन्होंने कहा कि निखिल के साथ ही उनके परिवार की खुशियां चली गई। बेटे के हत्यारोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
भाई यहां सब ठीक चला रहा है, पढ़ाई भी ठीक हो रही है
निखिल के साथ उसके भाई मुकुल की दो दिन पहले ही बातचीत हुई थी। इस बातचीत को याद कर मुकुल के आंसू छलक आए। मुकुल ने बताया कि दो दिन पहले ही निखिल का फोन आया था। उसने बताया था कि भाई मेरठ में सब ठीक चल रहा है, पढ़ाई भी ठीक हो रही है, आप बताओ कैसे हो, मम्मी-पापा व शिवानी कैसी है। दोनों भाईयों में करीब दस से पंद्रह मिनट बातचीत हुई। दोनों के बीच वह आखिरी बातचीत थी।