उत्तर प्रदेश की बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद सारे सवाल अनसुलझे हैं। चार राज्यों की पुलिस मिलकर भी वारदात की कड़ियां नहीं जोड़ पाई है। यूपी पुलिस के अलावा उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा पुलिस भी वारदात की गुत्थियों को सुलझाने में नाकाम साबित हुई हैं। सुनील राठी के गुर्गों को हिरासत में लेकर कई बार पूछताछ की गई। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला है।
मुन्ना बजरंगी हत्याकांडः चार जिलों की पुलिस और नतीजा ढाक के तीन पात, अब भी अनसुलझे हैं ये सवाल
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पुलिस अभी तक यह भी पता नहीं लगा पाई है कि आखिर जिला कारागार में पिस्टल कैसे पहुंचा। हत्या बरामद पिस्टल से नहीं हुई तो हत्या में प्रयुक्त पिस्टल कहां गया।
पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मारकर हत्या की सनसनीखेज वारदात को सुलझाने में पुलिस खुद उलझकर रह गई है। राठी की उत्तराखंड में सक्रियता के एंगल पर भी जांच की गई। रुड़की में राठी के कई ठिकाने हैं और पुलिस कई गुर्गों से पूछताछ कर चुकी है। दिल्ली में राठी के कई शातिर शूटर हैं।
दिल्ली पुलिस की मदद से इन तक पहुंचने की कोशिश की गई। लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। बागपत जेल में राठी से मिलने आने वाले हरियाणा के युवकों से जानकारी लेने की कोशिश की गई। लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। यूपी पुलिस की चार से अधिक टीम पड़ताल में कुछ हासिल नहीं कर सकीं। पुलिस ने कई शहरों में छानबीन की। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात जैसा ही है।
कॉलर का पता नहीं लगा पाई पुलिसः
मुन्ना बजरंगी के अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव ने हत्या के बाद आरोप लगाया था कि जिस वक्त झांसी जेल से एंबुलेंस में बजरंगी को लेकर चले थे, तब यह तय हुआ था कि पुलिस लाइन में रुकना है। बागपत पहुंचने के बाद एंबुलेंस और सुरक्षाकर्मी पुलिस लाइन की तरफ ही जा रहे थे।
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