मेरठ में मुहर्रम की दस तारीख शुक्रवार को हजरत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और करबला के शहीदों को बड़े ही गमगीन माहौल में अलविदा कहा गया। हजरत इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत को याद करते हुए शहर क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से मातमी जुलूस निकाले गए। सोगवारों ने जंजीरों से मातमपुर्सी कर या हुसैन की सदाओं के बीच छोटी करबला चौड़ा कुआं घंटाघर से जुलूस ए अलम, जुलजुनाह और जुलूस ए ताजिये हसन मुर्तजा के संयोजन में बरामद किए।
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- फोटो : अमर उजाला
शाम को ताजिये करबला मनसबिया रेलवे रोड पर दफन किए गए। हजारों की संख्या में अमाल अदा किए। मो. हैदर जावेद इमामबारगाह इनायत हुसैन से, सरदार हुसैन मरहूम के अजाखाने कोटला से ताजिये बरामद होकर चौड़ा कुआं से प्रारंभ बड़े जुलूस में शामिल हुए।
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जुलूस में अंजुमन इमामिया के वाजिद अली गप्पू ने अपने नौहों में इमाम हुसैन के हिंदुस्तान ना आने की कसक को यूं बयां किया - करबला जाते ना मौला काश आ जाते यहीं-मुंतजिर सदियों से अब तलक हिंदुस्तान है।
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इसके अतिरिक्त जुलूस में दस्ताए हुसैनी के हुमायूं अब्बास ताबिश, इरफान हुसैन, तंजीम ए अब्बास के सफदर अली हिंदुस्तान, अतीक उल हसनैन ने दर्द भरे नौहे पढ़े। जुलूस की व्यवस्था मुहर्रम कमेटी के संयोजक शाह अब्बास सफवी, डॉ. सरदार हुसैन, फखरी जाफरी, बाकर जैदी, तालिब जैदी, अकबर अली, अली हैदर रिजवी, नियाज हुसैन गुड्डू, कौसर रजा, हैदर अब्बास, एडवाकेट फजल हसनैन जैदी आदि ने संभाली। जुलूस करबला मनसबिया पहुंचकर संपन्न हुआ।
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इससे पहले सुबह 8 बजे हसन अली मरहूम के अजाखाने जाहिदियान से अलम हजरत अब्बास और इराक से लाए गए परचम की जियारत ए जुलूस विभिन्न मार्गों से होता हुआ मखदूम शाहविलायत पहुंचा। कर्बला गेट-3 में तबर्रूकात दफन किए गए। हाजी शमशाद अली, यूसुफ अली, सुल्तान हैदर, उरूज जैदी सहित हुसैनी सोगवार शामिल रहे।