नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ लोगों को उकसाकर उपद्रव कराने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और एसडीएफआई संगठन की साजिशों की पोल खुलने लगी हैं।
उपद्रव के पीछे थी बड़ी योजना, पीएफआई-एसडीएफआई संगठन की साजिश बेनकाब, गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट
20 दिसंबर का उपद्रव पीएफआई व एसडीएफआई ने कराया था। बाहरी युवकों को बुलाकर स्थानीय लोगों से मुलाकात कराई ओर फिर हिंसा करा दी। लखनऊ में पीएफआई से जुड़े चार लोगों को पकड़कर खुलासा किया गया था।
उसके बाद मेरठ पुलिस ने पीएफआई से जुड़े दो आरोपी अमजद, जावेद और एसडीएफआई से नूर हसन व अब्दुल मुरीद को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस जांच में सामने आया कि इस संगठन का उद्देश्य देशभर में दंगे फसाद, सांप्रदायिक घटना और आगजनी कराना था।
यह संगठन एक साल से वेस्ट यूपी में सक्रिय है। नौ नवंबर 2019 को भी अयोध्या फैसले को लेकर लोगोें को उकसाने के लिए पोस्टर व पर्चे बांटे गए थे। टेंपो, ई-रिक्शा और धार्मिक स्थल पर पोस्टर लगाए गए थे।
कुछ लोगों के साथ मीटिंग में दोनो ही संगठन से जुड़े लोग महिलाओं को बुलाने की बात कहते थे।
उनका कहना था कि महिलाओं को सीएए के खिलाफ सड़कों पर उतारें। लेकिन महिलाएं पीछे हटीं तो युवा और बच्चों को उकसाया गया। गली मोहल्ले में पर्चे और पोस्टर बांटकर लोगों के खिलाफ भड़काने का काम चलता रहा। इसकी जानकारी पर पुलिस गंभीर नहीं हुई थी।
संगठनों से जुड़ी हैं महिलाएं
पुलिस ने बताया कि उपद्रव में महिलाओं को शामिल कराने पर सबसे ज्यादा जोर था क्योंकि दोनों संगठनों से कई महिलाएं भी जुड़ी हैं। इसके बावजूद महिलाओं ने इनकार किया। उन्हें सीएए के खिलाफ भड़काकर पैसों का भी लालच दिया गया। उपद्रव में चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद यह बात सामने आई है।
रिमांड पर लेंगे चारों आरोपी
एसपी सिटी डॉ. एएन सिंह का कहना है कि पीएफआई और एसडीएफआई के जेल भेजे गए चारों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। दोनों संगठनों से काफी संख्या में लोग जुड़े हैं, जिनकी तलाश में हापुड़, दिल्ली समेत कई जगहों पर दबिश जारी हैं।