देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए मौत से जंग लड़ने वाले भराला गांव के रिटायर्ड फौजी ने फिर से जंग की तैयारी शुरू कर दी है। ये जंग है देश के लिए विभिन्न खेलों में मेडल लाने की। खुद तैयारी करने के साथ वह गांव और आसपास क्षेत्रों के बच्चों को भी प्रशिक्षित कर रहे हैं। करीब दो साल से बच्चों को निशुल्क ट्रेनिंग देकर वह कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
भराला गांव निवासी फौजी रविंद्र कुमार ने बरेली में तैनाती के दौरान सन् 2016 में रिटायरमेंट ले लिया था। इसका बड़ा कारण उनका अनफिट होना था। फौज में रहते हुए 2010-12 में उनकी सियाचिन में पोस्टिंग थी। 100 दिन वह टॉप हिल्स पर रहे। वहां हुए एक हादसे के दौरान रविंद्र कुमार कोमा में चले गए। चंडीगढ़ और पठानकोट मिलिट्री हॉस्पिटल में महीनों चले उपचार के बाद उन्होंने मौत को हरा दिया। लेकिन वह अपनी पुरानी फिटनेस नहीं पा सके।
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रिटायरमेंट के बाद पत्नी सरिता और बेटे वंश ने हौसला बढ़ाया तो रविंद्र ने अपनी फिटनेस पर काम शुरू किया। करीब दो साल की मेहनत के बाद अब वह नए मुकाम पर हैं।
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गांव में खोली एकेडमी :
रविंद्र ने खुद प्रेक्टिस के साथ गांव में बच्चों के लिए निशुल्क आरके एकेडमी खोल दी। यहां वह बच्चों को भी खेलों का प्रशिक्षण देते हैं। जगह कम पड़ने पर वेद इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन अजित कुमार ने उन्हें अपने यहां पर प्रेक्टिस के लिए ट्रैक दे दिया। अब वह स्कूल में ही प्रशिक्षण देते हैं। वर्तमान में उनके पास 50 लड़के और 15 लड़कियां टेनिंग ले रही हैं।
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बच्चों के लिए छोड़ दी नौकरी
कोच रविंद्र कुमार ने बताया कि बीते साल दिल्ली पुलिस की फिजिकल और लिखित परीक्षा पास कर ली थी। लेकिन कोचिंग ले रहे बच्चों ने उन्हें जाने नहीं दिया। अब वह तन-मन और से बच्चों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।