दिल्ली से मेरठ तक हाईस्पीड ट्रेन से मात्र 55 मिनट मे सफर पूरा होने का सपना साकार होने वाला है। बुधवार को दुहाई स्थित डिपो में रैपिड रेल के मॉडल कोच को दिखाया गया। गुजरात के सांवली में एल्सटॉम कंपनी ने कोच तैयार किया है। मई में साहिबाबाद से दुहाई तक 17 किमी पहले चरण में ट्रायल रन शुरू हो जाएगा। मार्च-2023 से पहले चरण में रैपिड रेल का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए 210 कोच 40 (ट्रेनसेट) की जल्द डिलीवरी होने वाली है। दुहाई से मेरठ दक्षिण तक 20 किमी लंबे कॉरिडोर पर दिसंबर-2023 में ट्रेन का संचालन शुरू होगा।
दिल खुश कर देंगी ये तस्वीरेंः कई हाईटेक ट्रेनों से भी ज्यादा खास है रैपिड रेल, इन सुविधाओं से हैं लैस, जानें सब कुछ
दिल्ली से मेरठ तक हाईस्पीड ट्रेन से मात्र 55 मिनट मे सफर पूरा होने का सपना साकार होने वाला है। बुधवार को दुहाई स्थित डिपो में रैपिड रेल के मॉडल कोच को दिखाया गया। गुजरात के सांवली में एल्सटॉम कंपनी ने कोच तैयार किया है।
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इसके अलावा यात्री को सीट के बराबर में ही मोबाइल और लैपटॉप के लिए चार्जिंग प्वाइंट दिए गए हैं, जिससे वह आसानी से अपना कार्यालय सहित अन्य जरूरी कार्य को बिना किसी रुकावट के पूरा कर सके। वहीं, दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर के स्थान को तय किया गया है। बीमार व्यक्ति को दिल्ली से मेरठ जाने में स्ट्रेचर पर भी कोच के अंदर ले जाया जा सकेगा।
तीसरी आंख से होगी निगरानी
स्टेशन पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ कोच के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे, जिससे कोच के अंदर असामाजिक तत्व किसी भी तरह की गतिविधि को न कर सकें। इससे यात्रियों की सुरक्षा को ओर पुख्ता करने में मदद मिलेगी।
दूसरे चरण में मेरठ साउथ तक चलेगी
पहले चरण में साहिबाबाद से दुहाई तक पांच स्टेशनों (साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई, दुहाई डिपो) पर संचालन शुरू होने के बाद दिसंबर-2023 तक दूसरे चरण में रैपिड रेल का संचालन मेरठ साउथ तक कर दिया जाएगा। इसमें मुरादनगर, मोदीनगर साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मेरठ साउथ स्टेशन शामिल हैं। वर्ष -2025 तक सरायकाले खां से मोदीपुरम तक संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इसमें मेरठ मेट्रो के 12 स्टेशन शामिल हैं।
कोच में होगी यह सुविधाएं
- कोच में यात्रियों के खड़े होने व सामान रखने पर्याप्त जगह होगी
- हर सीट पर मोबाइल व लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट और वाईफाई की सुविधा
- दिव्यांगों के लिए दरवाजों के पास व्हील चेयर की जगह व स्ट्रेचर ले जाने का प्रावधान
- कोट को टांगने केलिए होंगे हुक, मैगजीन होल्डर भी होगा
- बाहर रोशनी के अनुसार केबिन में खुद नियंत्रित होगी प्रकाश की व्यवस्था
- ब्रेकिंग सिस्टम के जरिए पैदा होने वाली ऊर्जा का होगा इस्तेमाल
- ट्रेन में स्वचालित संचालन प्रणाली का होगा इस्तेमाल
- प्रीमियम कोच में सीट को फैलाने (रिक्लाइन) की सुविधा, सीटों में भी होंगे हैंडल