पांडवों की धरती पर पर्यटकों का आवागमन बढ़ गया है। भारतीय ही नहीं विदेशी भी हस्तिनापुर की उस भूमि को देखना चाहते हैं जहां कौरव-पांडवों का जन्म हुआ। यह भी जानना चाहते हैं कि आखिर उस मिट्टी में ऐसा क्या था जो यहां आकर श्रवण कुमार का मन भी बदल गया था।
पिछले पांच वर्षों में मेरठ की धरती पर पर्यटकों की संख्या में 30 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है। मेरठ के लिए अच्छी बात है कि मेरठ की जमीन पर भारतीय ही नहीं विदेशी पर्यटकों का आवागमन भी बढ़ा है।
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हस्तिनापुर
- फोटो : अमर उजाला
वहीं प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग ने हाल में पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या जारी की है। इस संख्या में मेरठ के हस्तिनापुर और सरधना में साल 2017 में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। हस्तिनापुर में साल 2017 में 809365 व सरधना में 799160 पर्यटक आए। यह संख्या साल 2013 की संख्या से लगातार बढ़ी है। साल 2013 में हस्तिनापुर में 661471 पर्यटक आए थे। जबकि साल 2017 में यह संख्या 809365 हो गई।
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पांडवेश्वर मंदिर
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इसी तरह सरधना में साल 2013 में यह संख्या 652771 थी जो साल 2017 में बढ़कर 799160 रही। विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी लगातार इजाफा हुआ है।
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पांडवेश्वर मंदिर
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महाभारत सर्किट, हवाई उड़ान से मिलता लाभ
लंबे समय से मेरठ को महाभारत सर्किट बनाने की मांग उठ रही है। लेकिन सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। मेरठ को महाभारत सर्किट में शामिल किया जाता या इसे सर्किट बनाया जाता तो यहां पर्यटन और बढ़ सकता है। पर्यटक तो मेरठ, हस्तिनापुर आने की रुचि दिखा रहे हैं। लेकिन संसाधनों का अभाव उनके कदम रोकता है। हवाई अड्डा बने और महाभारत सर्किट में मेरठ को शामिल किया जाए तो पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है।