उत्तर प्रदेश के मेरठ में मेडिकल कॉलेज का हाल बेहाल है। कभी शव बदल दिए जाते हैं तो कभी बंदर कोरोना मरीजों के ब्लड सैंपल लेकर भाग जाता है। मंगलवार दोपहर भी कुछ ऐसा ही हाल था। व्हीलचेयर और स्ट्रेचर के लिए मरीज परेशान नजर आए। अगर किसी को मिल भी गया तो खुद तीमारदार उसे खींचकर ले जा रहे थे।
आखिर क्यों नहीं सुधरता मेडिकल कॉलेज का हाल, फिर सामने आई बड़ी लापरवाही, देखिए तस्वीरें
कोई वार्ड ब्वॉय या कर्मचारी मरीजों को लाते या ले जाते नजर नहीं आ रहा था। महिलाएं तक खुद स्ट्रेचर खींच रही थीं। एक मरीज महिला को व्हीलचेयर ही नहीं मिली। उसके तीमारदार उसे पकड़कर धीरे-धीरे ले जा रहे थे।
वहीं मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी के सामने सड़क पर कई दिन से पानी भरा हुआ है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। ओपीडी में सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार नजर आई, जबकि मेडिकल कॉलेज स्टाफ से अब तक 25 से ज्यादा लोग संक्रमित निकल चुके हैं।
इनमें चिकित्सक, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, कर्मचारी आदि शामिल हैं। एक स्टाफ नर्स की सोमवार को मौत भी हो गई थी। इसके बावजूद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा है।
प्रबंध कमेटी से बात की है, जल्द सुधार नजर आएगा
मेडिकल कॉलेज में जो कमियां हैं, उनको दूर करने की कोशिश की जा रही है। इस संबंध में प्रबंध कमेटी के सदस्यों से बात की गई है। जल्द ही सुधार नजर आएगा। - डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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