मेरठ के कमला नगर में बिल्डर प्रदीप गुप्ता की कोठी में वारदात करने वाले नेपाली नौकर वीर बहादुर उर्फ वीरू पर एसएसपी ने ₹25000 का इनाम कर दिया। उसके मोबाइल की आईडी लखीमपुर खीरी के पते पर मिली है, जहां से उसने आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाया हुआ है। पुलिस ने जांच पड़ताल की तो पता चला है कि नौ जुलाई को वीर बहादुर ने इसी तरह दिल्ली के बिल्डर की कोठी में भी वारदात को अंजाम दिया था। जिसका मुकदमा दिल्ली में फतेहपुर थाने में दर्ज है। पुलिस का दावा है कि दिल्ली में वारदात करने से पहले उसने गुरुग्राम सिक्योरिटी एजेंसी से सेटिंग करके बिल्डर के यहां नौकरी लगवाई थी। पुलिस ने सिक्योरिटी गार्ड एजेंसी के यहां से 3 लोगों को हिरासत में लिया है। सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।
MEERUT: नेपाली नौकर ने गार्ड को खिलाया खीर-परांठा, दो घंटे में खंगाली कोठी, SSP ने रखा 25 हजार का इनाम
एक कैमरे में नजर आया नौकर
चालू मिले एक कैमरे में नेपाली नौकर सहित चार लोग नजर आए हैं। रविवार शाम चार बजे यह कोठी की ओर जाते नजर आए हैं। राकेश पूरी तरह से होश में नहीं था। इसके बावजूद उसने पुलिस को बताया कि शाम चार बजे वीर बहादुर ने फोन कर उसे कोठी में बुलाया था।
खाना खाने के बाद बेहोश वह बेहोश हो गया और इसके बाद का उन्हें कुछ पता नहीं है। पुलिस ने नौकर और गार्ड के मोबाइल की सीडीआर भी निकाली है। फुटेज में नौकर के साथ तीन युवक कॉलोनी से बाहर जाते हुए भी दिख रहे हैं।
पुलिस का मानना कि यह घटना शाम 4 से 6 बजे के बीच की है। पुलिस ने प्रदीप गुप्ता को गार्ड उपलब्ध करने वाले सरदार सिद्धू को बुलाकर पूछताछ की। सरदार सिद्धू ने बताया कि वह समाजसेवी हैं।
एक सप्ताह पहले ही नौकरी मांगने के लिए वीर बहादुर उनके ऑफिस मेट्रो प्लाजा में आया था। मैंने उनको प्रदीप गुप्ता के पास भेज दिया था। मैंने उसकी आईडी नहीं ली। वह कहां से आया था, इसका मुझे कोई पता नहीं। वह वीर बहादुर है या कोई ओर, मुझे यह भी नहीं पता।
गार्ड ने यह बताया...
गार्ड मनोज: जब मैं कोठी के अंदर खाना खाने गया था, उस वक्त वीर बहादुर कपड़े धो रहा था। खाना खाने के बाद बेहोश हो गया था। परिवार वाले मुझे कोठी से लेकर चले गए। वीर बहादुर ने क्या किया, इसके बारे में मुझे नहीं पता। अभी मेरी हालत ठीक नहीं है। यह सुनते ही पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया दिया।
गार्ड राकेश: मैं प्रदीप गुप्ता के ऑफिस पर रहता हूं। वह दिल्ली जाएंगे, यह बात कहकर मुझे रात में कोठी पर रहने को कहा था। वह शाम छह बजे कोठी पर गए थे। वहां मनोज नहीं मिला। कुछ सामान बिखरा हुआ पड़ा था, लेकिन मैंने सोचा कि जल्दबाजी में सामान ऐसे छोड़ गए होंगे। यह सोचकर किसी को नहीं बताया। डेढ़ घंटे बाद मनोज कोठी में ही मिला। परिवार वाले उसे ले गए थे।