मेरठ के सरधना थाने इलाके के कपसाड़ कांड के आरोपी पारस सोम की आयु को लेकर उनके परिजन अपने अधिवक्ता के जरिये न्यायालय में बुधवार को प्रमाणपत्र दाखिल कर सकते है। जेल में बंद पारस ने जेल अधीक्षक डॉ वीरेश राज शर्मा से मिलकर खुद को नाबालिग बताया था। अब उसकी उम्र को लेकर चर्चा होने लगी है। वहीं पुलिस फरसा बरामद करने के लिए पारस को रिमांड पर लेने की तैयार भी कर रही है।
11 जनवरी को उसे कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया था। जेल में आरोपी पारस ने खुद को नाबालिग बताया था। जिस पर जेल अधीक्षक ने उससे इस संबंध में न्यायालय में प्रमाणपत्र पेश करने के बात कही थी।
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आरोपी पारस सोम को पुलिस ने स्पेशल सीजेएम की कोर्ट में पेश किया। इस दौरान लोगों की लगी भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शैक्षिक प्रमाण पत्र और आधार कार्ड में नाबालिग है पारस
आरोपी के अधिवक्ता के अनुसार, पारस सोम के परिजनों ने उसके शैक्षिक प्रमाण पत्र, आधार कार्ड आदि उन्हें सौंप दिए है। जिनके आधार पर पारस नाबालिग है। इस संबंध में बुधवार को कोर्ट में उसके आयु संबंधित प्रमाण पत्रों को दाखिल किया जाएगा।
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आरोपी पारस सोम को पुलिस ने स्पेशल सीजेएम की कोर्ट में पेश किया। इस दौरान लोगों की लगी भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
'आयु संबंधित कोई भी प्रमाण पत्र या शपथ पत्र नहीं दिए है'
जेल अधीक्षक ने बताया कि न्यायालय के जो भी आदेश होंगे उसका पालन कराया जाएगा। यदि वह नाबालिग हुआ तो कोर्ट के आदेश के अनुसार, उसे बाल सुधार गृह भेजा जाएगा। उधर, इस केस के विवेचक सीओ सरधना आशुतोष कुमार का कहना है कि आरोपी पक्ष ने अभी तक उन्हें आयु संबंधित कोई भी प्रमाण पत्र या शपथ पत्र नहीं दिए है।
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आरोपी पारस सोम का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुख्य आरोपी पारस सोम को सलाखों के पीछे भेजा
इधर रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या के बाद कपसाड़ गांव पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है। हालांकि पुलिस ने मुख्य आरोपी पारस सोम को सलाखों के पीछे भेज दिया है और रूबी भी अपने घर सुरक्षित लौट आई है लेकिन प्रशासन सुरक्षा को लेकर रत्ती भर भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। हालात यह हैं कि पीड़िता रूबी के घर की दहलीज से लेकर गांव की सीमाओं तक पुलिस और अर्धसैनिक बलों का पहरा है।
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गांव कपसाड़ में घुसने पर चेकिंग करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अति आवश्यक होने पर ही मिल रहा प्रवेश
पुलिस प्रशासन ने गांव की नाकेबंदी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पहचान पत्र की गहन जांच के बिना किसी को भी गांव में कदम रखने की इजाजत नहीं होगी। सुरक्षा घेरा इतना सख्त है कि बाहरी व्यक्तियों और मीडिया कर्मियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। नाके पर तैनात जवान हर आगंतुक का पहचान पत्र बारीकी से जांच रहे हैं और केवल अति आवश्यक होने पर हो भीतर जाने की अनुमति दी जा रही है।