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फिर सुर्खियों में कपसाड़: दो परिवार... सात मर्डर, गंगनहर और खामोश गांव, 36 साल पहले जश्न के बीच बहा था खून

Tue, 13 Jan 2026 01:05 PM IST
शाहरुख खान शाह आलम त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
शाह आलम त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 13 Jan 2026 01:05 PM IST
सार

मेरठ के सरधना थाने का कपसाड़ गांव एक बार फिर से सुर्खियों में है। 36 साल पहले जश्न के बीच यहां खून खराबा हुआ था। दो परिवारों में सात हत्याएं हुईं थीं। कुछ ही मिनटों में सात जिंदगियां उजड़ गईं थीं।

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Meerut Murder and kidnapping Seven murders took place in two families in Kapsad 36 years ago
Meerut Murder and kidnapping - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
26 जनवरी 1989। मेरठ और देशभर में गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था। लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन रेडियो पर गूंज रहा था और इसी दौरान सरधना थाना क्षेत्र का गांव कपसाड़ खून से लाल हो रहा था। सुबह करीब साढ़े नौ बजे गांव में ऐसा कत्लेआम हुआ जिसने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को दहला दिया। 


सात लोगों की हत्या कर उनके शव गंगनहर में बहा दिए गए। शव कभी बरामद नहीं हो सके। यह वारदात उस समय के सबसे जघन्य अपराधों में शुमार हुई। गांव के लोग आज भी इस पर खुलकर नहीं बोलते। इस वारदात के बाद अब बेटी रूबी के अपहरण और मां सुनीता की हत्या के बाद कपसाड़ गांव एक बार फिर सुर्खियों में है।
 
Meerut Murder and kidnapping Seven murders took place in two families in Kapsad 36 years ago
गांव कपसाड़ में घुसने पर चेकिंग करती पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दो परिवार, एक गांव और पीढ़ियों की दुश्मनी
इस हत्याकांड की जड़ें वर्षों पुरानी थीं। हरवंश सिंह और रंजीत सिंह के परिवार मूल रूप से कपसाड़ के निवासी नहीं थे। एक पीढ़ी पहले दोनों परिवार गांव में आकर बसे थे। धीरे-धीरे आपसी विवाद बढ़ता गया और फिर यह दुश्मनी खूनी संघर्ष में बदल गई।
Meerut Murder and kidnapping Seven murders took place in two families in Kapsad 36 years ago
गांव कपसाड़ में गालियों व रास्तों पर तैनात पुलिस को दिशा निर्देश देते एसपी देहात अभिजीत कुमार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बताया जाता है कि रंजीत सिंह के बेटों द्वारा हरवंश सिंह की हत्या कर दी गई थी। इसी घटना ने दोनों परिवारों के बीच खून के बदले खून की परंपरा को जन्म दिया। इसके बाद गांव लगातार तनाव में रहा। खेतों में आगजनी, घरों पर हमले और खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन आम हो गया था।
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Meerut Murder and kidnapping Seven murders took place in two families in Kapsad 36 years ago
पुलिस ने की बैरिकेडिंग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
25 जनवरी की रात और 26 जनवरी की सुबह
ग्रामीणों के अनुसार, 25 जनवरी 1989 को हरवंश सिंह के बेटे विजयपाल सिंह, सतपाल सिंह, श्रीपाल सिंह और पृथ्वी सिंह गांव में पहुंचे थे। वे खुले तौर पर नहीं बल्कि गुप्त ठिकानों पर रहकर अपने विरोधियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।
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Meerut Murder and kidnapping Seven murders took place in two families in Kapsad 36 years ago
गांव कपसाड़ में मृतक के परिजनों से मिलने पर रोकती पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
26 जनवरी की सुबह रंजीत सिंह के बेटे सतपाल सिंह, हरि सिंह और उनके साथ करीब आठ लोग एक घर में बैठे प्रधानमंत्री का भाषण सुन रहे थे। उन्हें अंदेशा था कि हमला हो सकता है लेकिन समय और जगह का अनुमान नहीं था।
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