लाॅकडाउन के दौरान एक गर्भवती महिला सहारनपुर से बुलंदशहर के लिए चली तो रास्ते में खाना तक नहीं मिला। पिछले ढाई दिन में महिला पैदल चलकर सहारनपुर से मेरठ तक पहुंची। जहां शनिवार को महिला की सोहराब गेट बस अड्डे पर हालत बिगड़ गई।
नौचंदी पुलिस ने पीड़िता की आपबीती सुनी तो पुलिस का भी दिल पसीज गया। पुलिस ने महिला को एक हजार रुपए दिए। वही एंबुलेंस की व्यवस्था करके पुलिस ने गर्भवती को बुलंदशहर स्थित महिला के घर पर भिजवाया।
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- फोटो : amar ujala
वकील पुत्र बाबू निवासी अमरगढ़ थाना स्याना जिला बुलंदशहर सहारनपुर में एक फैक्टरी में काम करता था। युवक की पत्नी यासमीन साढे आठ माह की प्रेग्नेंट है। लॉकडाउन होने के चलते फैक्टरी मालिक ने दंपती को फैक्टरी से निकाल दिया। साथ ही घर जाने के लिए पैसे भी नहीं दिए।
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पीड़िता गुरुवार शाम अपने पति के साथ पैदल ही सहारनपुर से अपने घर के लिए बुलंदशहर के लिए चल पड़ी। ढाई दिन तक पैदल चलने के बाद महिला शनिवार दोपहर को गढ़ रोड पर सोहराब गेट बस अड्डे पर पहुंची। जहां महिला की हालत बिगड़ गई।
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इस बीच इंस्पेक्टर नौचंदी आशुतोष कुमार और एसआई प्रेमपाल मौके पर पहुंचे। जहां महिला का पति आपबीती सुनाने लगा। महिला ने बताया कि कल से उसे खाना भी नहीं मिला है और बहुत मजबूरी में है।
पुलिस ने दंपती को भोजन की व्यवस्था कराई। जिसके बाद प्राइवेट एंबुलेंस कराकर गर्भवती को बुलंदशहर के अमरगढ़ गांव में भिजवा दिया।
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लॉकडाउन मेरठ
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जिस समय नौचंदी पुलिस महिला से बात कर रही थी तभी एसएसपी अजय साहनी भी गढ़ रोड पर राउंड पर थे। जिसके बाद एसएसपी ने नौचंदी पुलिस से पूरे मामले की जानकारी ली। साथ ही दरोगा और इंस्पेक्टर के इस सराहनीय कार्य की भी प्रशंसा की।