पंचायत और बिगड़े बोल पर दिनभर चले घमासान के बाद पार्षदों की पिटाई प्रकरण का सातवें दिन शनिवार रात को नाटकीय ढंग से पटाक्षेप हो गया है। सपा नेता मुकेश सिद्धार्थ के विवादित बोल के बाद ही विपक्षी नेताओं के सुर बदल गए।
पार्षदों से मारपीट: विवादित बोल पर घमासान, फिर नाटकीय ढंग से पार्षदों की पिटाई का पटाक्षेप
कलक्ट्रेट में सपा नेता मुकेश सिद्धार्थ ने राज्यमंत्री के खिलाफ जहर उगला तो भाजपा नेता आक्रोशित हो गए। पुलिस मुकेश सिद्धार्थ पर मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश में जुट गई। इससे दबाव में आए सपा-बसपा, कांग्रेस, रालोद व एआईएमआईएम के नेताओं ने विवादित बोल की निंदा करनी शुरू कर दी। इसी बीच इंस्पेक्टर परतापुर ने कीर्ति को फोन कर थाने पर बुलाया।
पुलिस के साथ कीर्ति सर्किट हाउस पहुंचे। जहां पर भाजपा नेताओं की बैठक चल रही थी। यहां कीर्ति ने भाजपाइयों के सामने खुद के साथ जातिसूचक और गाली गलौज न किए जाने की बात कहकर समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसी के साथ सात दिन से चल रहे निगम संग्राम पर विराम लग गया। जिलाधिकारी के सामने भी पार्षद कीर्ति ने समझौते की बात कही है।
पार्षद बोले- समझौता हो गया बस
कीर्ति घोपला का कहना है कि परतापुर पुलिस के साथ वह सर्किट हाउस पहुंचे थे। जहां पर राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर, एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज सहित कई भाजपा नेता पहले से मौजूद थे। जहां पर मैंने एक कागज पर हस्ताक्षर किए हैं। कागज पर लिखा है कि न ही जाति सूचक शब्द कहे गए न ही गाली गलौज की गई। भाजपा नेताओं के साथ जाकर कीर्ति ने समझौते की प्रति जिलाधिकारी को सौंप दी।
समझौते के लिए दो बार पार्षदों से मिले अधिकारी
पार्षद आशीष चौधरी और कीर्ति घोपला से उनके घर पर नगर निगम के अधिकारियों ने मुलाकात की थी। निगम के अधिकारी भी समझौता कराने के लिए पार्षदों से बार-बार कह रहे थे। शनिवार को भी समझौते के बाद निगम अधिकारियों ने दोनों पार्षदों से फोन पर बात कर उनके क्षेत्र की समस्या के बारे में पूछा। निगम में आकर विकास कार्याें पर वार्ता करने को कहा है।
कानून व्यवस्था बनाने के लिए कलक्ट्रेट में पुलिस-प्रशासन मुस्तैद था। नगर निगम में पार्षदों की पिटाई के मामले में कई दिनों से गहमागहमी चल रही थी, जिसका शांतिपूर्वक और दोनों पक्ष की सहमति से पटाक्षेप हो गया। पार्षद कीर्ति घोपला आए थे और उन्होंने समझौते की बात कहते हुए कॉपी दी है। -दीपक मीणा, जिलाधिकारी