मेरठ के सौरभ राजपूत को रास्ते से हटाने के लिए उसकी पत्नी मुस्कान और साहिल ने हत्या और खुद को बचाने के लिए शव ठिकाने लगाने की घिनौनी साजिश रची थी। उन्होंने चाकू और उस्तरे से वारकर उसकी गर्दन व कलाइंया धड़ से अलग कर दीं थीं। दोनों पहले एक बड़ी अटैची में शव के टुकड़े रखकर ठिकाने लगाना चाहते थे लेकिन इसमें कामयाब नहीं होने पर आरोपियों ने नीले ड्रम में शव को छिपाया दिया था।
डीजीसी कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि कोर्ट में गवाहों के बयान में सामने आया कि आरोपियों ने साजिश रची थी कि वह हत्या के बाद शव को ठिकाने लगा देंगे। इसके बाद वह सभी से कह देंगे कि सौरभ वापस लंदन लौट गया है। अटैची में शव को ठीक से न रखे जाने की आशंका पर उन्होंने बाद में ड्रम में शव छिपाने की साजिश रची थी।
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ब्रह्मपुरी थाने के विवेचक निरीक्षक रमाकांत पचौरी और उपनिरीक्षक उपेंद्र कुमार को दिए गए बयानों में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल किया था। आरोपियों ने उन्हें बताया था कि लंदन से लौटने के बाद सौरभ उनके संबंधों में बाधा बन गया था। इसलिए उन्होंने उसे रास्ते से हटाने के लिए उसकी हत्या की थी।
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोपियों ने पहले उस्तरे व चाकू से सौरभ के सिर को धड़ से पूरी तरह अलग किया। फिर दोनों हाथों की कलाइयों को काट दिया। शव की दुर्गंध रोकने के लिए उन्होंने बाजार से बड़ा नीला प्लास्टिक का ड्रम, सीमेंट, बालू और डस्ट खरीदकर लाए। इसमें शव के कटे टुकड़ों को पॉलीथीन में लपेटकर रखा और ऊपर से सीमेंट व डस्ट का घोल डालकर सील कर दिया।
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चारों ओर से कटी थी गर्दन, शॉक और अत्यधिक रक्तस्राव से हुई मौत
सौरभ के शव का पोस्टमार्टम करने वाले वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिनेश सिंह चौहान ने अपने बयान में अदालत को बताया कि सौरभ की मृत्यु का कारण गर्दन और शरीर पर धारदार हथियार से किए गए गहरे वार थे। सदमा (शॉक) और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हुई थी। मृतक की गर्दन चारों तरफ से कटी हुई थी।
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साहिल और मुस्कान को डीजी कोर्ट में सजा सुनाने के दौरान तैनात पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इससे सांस की नली, मांसपेशियां और मुख्य रक्त वाहिकाएं कटने से सिर धड़ से अलग हो गया था। दोनों कलाइयां भी धड़ से अलग कटी हुई थीं। हालांकि शव अत्यधिक सड़न (एडवांस स्टेज ऑफ डिकम्पोज़िशन) की स्थिति में था। सीमेंट, बालू और डस्ट के भारी घेरे में जमा होने के कारण उस पर बाहरी कीड़े नहीं पड़े थे।