मेरठ में भूसा मंडी बवाल में जहां करीब 200 परिवारों के आशियाने राख हो गए। वहीं जिंदगी से संघर्ष करने के लिए ये परिवार अभी भी बेघर हैं। 24 घंटे यह पीड़ित लोग खुले आसमान के नीचे गुजार रहे हैं। आग से नुकसान के बाद इन परिवारों के सामने समस्याएं खड़ी हो गई हैं।
छह मार्च को बवालियों ने जमकर बवाल काटा था। आगजनी हुई तो करीब 200 झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। शनिवार को चौथे दिन भी यह हालात थे कि दोपहर को धूप से बचने के लिए दो मीटर की चादर के नीचे तीन-तीन परिवार एक साथ थे। अफसाना का कहना है कि उसके तीन बच्चे हैं। आग में सब कुछ जलकर राख हो गया। कुछ भी नहीं बचा। पूरे जीवन की कमाई तबाह हो गई।
अलीम का कहना है कि उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं। 19 साल की बेटी का निकाह करना था। लेकिन आग में सब कुछ चला गया। मेहनत मजदूरी करके जैसे तैसे परिवार का गुजारा किया जा रहा था। आग से झोपड़ी जलने के बाद बच्चों और पत्नी को खाना भी नसीब नहीं हो रहा। कुछ लोग खाना बांटकर सेवा कर रहे हैं।
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मेरठ बवाल
- फोटो : अमर उजाला
रुकैया ने कहा कि शनिवार को धूप तेज निकली तो बच्चों के लिए कपड़े की चादर बांधनी पड़ी। इसमें महिलाएं और बच्चों को किसी तरह धूप से बचने के लिए यही बचा है। भूसा मंडी में ही एक ढेर से महिलाएं और अन्य लोग कपड़े तलाश रहे थे। वहीं, मुख्य स्थानों पर जहां पुलिस फोर्स का पहरा था। रास्तों में भी पीड़ित लोगों में चर्चा रही कि सरकार भी कोई मदद उनकी नहीं कर रही।
जला हुआ सामान देखा
जिन झोपड़ियों में आग से सब कुछ जल गया, इनमें लोहे का सामान ही कुछ बचा। पीड़ित परिवारों ने लोहे और अन्य सामान को भी समेटना शुरू कर दिया। जिन लोगों की जहां-जहां झोपड़ी थी वहीं पर सामान रखना शुरू कर दिया है।