मेरठ में माल रोड से लेखानगर के बीच गुजरने वाली सड़क पर कैंट में अचानक लोगों की नजर 200 साल पुराने सेंट जोंस चर्च पर थम जाती है। इस चर्च की खूबसूरती यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को अपनी तरफ आकर्षित करती है। यह चर्च पश्चिमी यूपी में सबसे पुराना चर्च है...
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सेंट जोंस चर्च
- फोटो : अमर उजाला
सन 1819 में इस चर्च को ईस्ट इंडिया कंपनी की तरफ से चेपलिन रेव हेनरी फिशर ने स्थापित किया था। मेरठ में ब्रिटिश सेना का बड़ा मुख्यालय होने के चलते सैनिकों, अधिकारियों की अध्यात्मिक और धार्मिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चर्च को कैंट क्षेत्र के बीच बनाया गया। इसके समीप ही सेंट जोंस चर्च समाधि भी है।
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सेंट जोंस चर्च
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यह चर्च आकर्षक लॉन पेड़ों और हरियाली से घिरा हुआ है। इसमें विशिष्ट अंग्रेजी शैली का अनुरूप देखने को मिलता है। इसे पल्लाडियन, शास्त्रीय शैली पर बनाया गया है, जो प्रार्थना करने के लिए खुला स्थान प्रदान करता है। चर्च के पास ही सबसे पुराना कब्रिस्तान भी है। यहां पर कई अंग्रेज अफसरों की कब्र हैं।
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सेंट जोंस चर्च
- फोटो : अमर उजाला
वहीं इनके शीर्ष पर उत्कीर्णित पत्थर, नक्काशीदार स्तंभ और किनारों पर पुरावस्तु की संरचना देखने को मिलती है। यहां सबसे पुरानी कब्र वर्ष 1810 की है। 31 अक्तूबर 1814 में खलांगा के युद्ध में मारे गए जनरल ह्यूग रॉबर्ट रोलो गिलेस्पी की भी समाधि भी यहीं पर है।
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सेंट जोंस चर्च
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा 1857 के गदर में मारे गए अंग्रेज सैनिकों और अफसरों की कब्र यहां पर हैं। हर साल इंग्लैंड और दूसरे देशों से विदेशियों का एक दल अपने पुरखों की कब्र पर फूल चढ़ाने के लिए आता है। वे सभी चर्च में प्रार्थना करते हैं। इस ऐतिहासिक चर्च में फर्नीचर एवं दीवारों पर लगे शिलालेख आज भी देखने को मिलते हैं।