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टूटे सपने : बड़े अरमान थे बहन की शादी के, अब कौन विदा करेगा श्रेयांश.., कहते हुए बिलखते रहे शहीद के पिता

Sun, 30 May 2021 02:28 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 30 May 2021 02:28 PM IST
सार

पिता बताते हैं कि बहन की शादी की बात लगभग पूरी हो चुकी है। इंजीनियर बहन की शादी को लेकर उसके बड़े अरमान थे। 28 मई को उनको ऐसी दुखद खबर मिली कि सारे सपने पलभर में बिखर गए।

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Martyredom : last ride of martyr captain shreyansh kashyap  in meerut
शहीद बेटे का पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही बिलख पड़े परिजन - फोटो : amar ujala
शहीद कैप्टन श्रेयांश कश्यप बहन की शादी धूमधाम से करना चाहते थे। इसके लिए होली पर छुट्टी आने के दौरान उन्होंने खाने के मेन्यू से लेकर विदाई तक के कार्यक्रम और जिम्मेदारियां तक तय कर दी थीं। पापा से कहा था-आपको कुछ नहीं देखना है। सब कुछ मैं करूंगा। आप बस मेहमाननवाजी करना।


शनिवार को श्रेयांश के पिता शिव गोविंद सिंह ये बताते हुए बिलखने लगे। बोले-अब कौन सब क्या देखेगा... मेरा तो दोस्त और दाहिना हाथ चला गया। जिस बेटे को उन्होंने उंगली पकड़कर चलना सिखाया। आज उसके पार्थिव शरीर को लेकर घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। पत्नी, बेटी और छोटा बेटा उनसे लिपटकर बस यही पूछ रहे थे-पापा, श्रेयांश को आप आज ऐसे क्यों लेकर आए हो। जब भी आता था सबको हंसाता रहता था...ये आज कुछ बोलता क्यों नहीं है। 



 
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शहीद कैप्टन श्रेयांश कश्यप - फोटो : amar ujala
मूल रूप से बनारस में बीएचयू के पास टिकरी गांव निवासी शिव गोविंद सिंह की 15 साल पहले पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया में नौकरी लगी थी। तब से वह परिवार के साथ यहीं रहने लगे। बड़े बेटे श्रेयांश कश्यप की शुरुआती पढ़ाई मोदीपुरम स्थित डीएमए स्कूल से हुई। गाजियाबाद स्थित काइट से इंजीनियरिंग की।

शुरू से ही होनहार श्रेयांश ने जब सेना में जाने का मन बनाया तो परिवार को पता नहीं चला। बस यही कहते थे कि पापा सेना में जाकर कुछ करना चाहता हूं। 12वीं तक स्कूल के टॉपर रहे। सेना में चयन के बाद आईएमए देहरादून गए तो वहां भी अव्वल रहे। सेना में कमीशन होने के बाद से शादी के रिश्ते आने शुरू हो गए लेकिन श्रेयांश से बड़ी बहन सृष्टि हैं, इसलिए उन्होंने पापा से कहा कि रिश्ते वालों को बता दीजिए कि पहले मुझे बहन की शादी करनी है।
Martyredom : last ride of martyr captain shreyansh kashyap  in meerut
शनिवार रात को शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचने के दौरान खड़े परिजन - फोटो : amar ujala
पिता बताते हैं कि बहन की शादी की बात लगभग पूरी हो चुकी है। इंजीनियर बहन की शादी को लेकर उसके बड़े अरमान थे। 28 मई को उनको ऐसी दुखद खबर मिली कि सारे सपने पलभर में बिखर गए। बेटे के पार्थिव शरीर के साथ दिल्ली से गाड़ी में आ रहे बहादुर पिता बस इतना ही बोल पाए कि मेरा तो दाहिना हाथ चला गया।

बहन-भाई और परिवार के लिए ही सोचता था
भर्राए गले से पिता ने बताया कि आईएमए में पढ़ाना भी आसान नहीं होता है लेकिन श्रेयांश तीनों बच्चों में इतना गंभीर था कि वो सबकुछ समझता था। उसने कभी किसी चीज की मांग नहीं की। बस जब भी सोचता था बहन, भाई और हमारे लिए सोचता था। वह जानता था कि पापा हम सबको किन परिस्थितियों में पढ़ा रहे हैं। 
 
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शहीद श्रेयांश के आवास पर दिन भर लगी रही सांत्वना देने वालों की भीड़ - फोटो : amar ujala

बेटे का स्कूल आया तो बिलख पड़े पिता 
श्रेयांश के पार्थिव शरीर को दिल्ली एयरपोर्ट से रात सेना की गाड़ी से मटौर लाया गया। 10 बजकर 18 मिनट पर सेना का वाहन दयावती मोदी एकेडमी के सामने पहुंचा तो पिता बिलख पड़े।उन्होनें श्रेयांश की यूनिट के साथियों को बताया कि मेरे श्रेयांश का स्कूल ये है। इसके बाद वे कुछ नहीं बोल सके। 

पिता के सामने ही आया हार्ट अटैक
पिता शिव गोविंद सिंह ने बताया कि तबीयत खराब होने की सूचना उन्हें सैन्य यूनिट की ओर से दी गई थी। सूचना मिलने पर वह करीब पांच घंटे में बेटे के पास पहुंच गए। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन की कमी हो जाने के कारण आठवीं बार उनके सामने ही हार्ट अटैक आया। उन्होंने मेरठ में अपने पारिवारिक डॉक्टर हरीश मोहन को फोन पर जानकारी दी। उन्होंने स्थिति को गंभीर बताया।

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विलाप करती शहीद की मां व बहनें - फोटो : amar ujala
‘झूठे निकले तेरे वादे भाई...प्लीज एक बार तो बोल दे’
कैप्टन श्रेयांश का पार्थिव शरीर मटौर ग्रिड स्थित आवास पर पहुंचा तो मां सीमा बदहवास हो गईं। बहन सृष्टि का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। छोटा भाई शिवांश बार-बार मां-पिता और बहन से लिपटकर पूछता रहा कि भइया से बोलो न...कुछ बोलते क्यों नहीं हैं। बेबस पिता आंसू बहाने के अलावा कुछ नहीं बोल सके...बस इतना ही बोलते रहे कि सबकुछ खत्म हो गया। 

बड़ी बहन और छोटा भाई भी इंजीनियर
श्रेयांश की बड़ी बहन सृष्टि आईबीएम गुरुग्राम में इंजीनियर हैं। छोटा भाई शिवांश बंगलूरू में टीसीएस कंपनी में इंजीनियर है। दोनों लॉकडाउन की वजह से आजकल घर से ही काम कर रहे हैं। शुक्रवार को पिता ने श्रेयांश के शहीद होने की खबर दी तो आंसुओं का सैलाब आ गया। मां,  बहन और भाई रो-रोकर बदहवास हो गए। बहन बस यही कहते हुए रोती रही कि तेरे वादे तो झूूठे निकले भाई... प्लीज एक बार तो बोल दे। मां  बिलखते हुए कहती रहीं कि मेरे बाबू का एक बार चेहरा दिखा दो। 
 
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