टूटे सपने : बड़े अरमान थे बहन की शादी के, अब कौन विदा करेगा श्रेयांश.., कहते हुए बिलखते रहे शहीद के पिता
पिता बताते हैं कि बहन की शादी की बात लगभग पूरी हो चुकी है। इंजीनियर बहन की शादी को लेकर उसके बड़े अरमान थे। 28 मई को उनको ऐसी दुखद खबर मिली कि सारे सपने पलभर में बिखर गए।
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शुरू से ही होनहार श्रेयांश ने जब सेना में जाने का मन बनाया तो परिवार को पता नहीं चला। बस यही कहते थे कि पापा सेना में जाकर कुछ करना चाहता हूं। 12वीं तक स्कूल के टॉपर रहे। सेना में चयन के बाद आईएमए देहरादून गए तो वहां भी अव्वल रहे। सेना में कमीशन होने के बाद से शादी के रिश्ते आने शुरू हो गए लेकिन श्रेयांश से बड़ी बहन सृष्टि हैं, इसलिए उन्होंने पापा से कहा कि रिश्ते वालों को बता दीजिए कि पहले मुझे बहन की शादी करनी है।
बहन-भाई और परिवार के लिए ही सोचता था
भर्राए गले से पिता ने बताया कि आईएमए में पढ़ाना भी आसान नहीं होता है लेकिन श्रेयांश तीनों बच्चों में इतना गंभीर था कि वो सबकुछ समझता था। उसने कभी किसी चीज की मांग नहीं की। बस जब भी सोचता था बहन, भाई और हमारे लिए सोचता था। वह जानता था कि पापा हम सबको किन परिस्थितियों में पढ़ा रहे हैं।
बेटे का स्कूल आया तो बिलख पड़े पिता
श्रेयांश के पार्थिव शरीर को दिल्ली एयरपोर्ट से रात सेना की गाड़ी से मटौर लाया गया। 10 बजकर 18 मिनट पर सेना का वाहन दयावती मोदी एकेडमी के सामने पहुंचा तो पिता बिलख पड़े।उन्होनें श्रेयांश की यूनिट के साथियों को बताया कि मेरे श्रेयांश का स्कूल ये है। इसके बाद वे कुछ नहीं बोल सके।
पिता के सामने ही आया हार्ट अटैक
पिता शिव गोविंद सिंह ने बताया कि तबीयत खराब होने की सूचना उन्हें सैन्य यूनिट की ओर से दी गई थी। सूचना मिलने पर वह करीब पांच घंटे में बेटे के पास पहुंच गए। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन की कमी हो जाने के कारण आठवीं बार उनके सामने ही हार्ट अटैक आया। उन्होंने मेरठ में अपने पारिवारिक डॉक्टर हरीश मोहन को फोन पर जानकारी दी। उन्होंने स्थिति को गंभीर बताया।
कैप्टन श्रेयांश का पार्थिव शरीर मटौर ग्रिड स्थित आवास पर पहुंचा तो मां सीमा बदहवास हो गईं। बहन सृष्टि का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। छोटा भाई शिवांश बार-बार मां-पिता और बहन से लिपटकर पूछता रहा कि भइया से बोलो न...कुछ बोलते क्यों नहीं हैं। बेबस पिता आंसू बहाने के अलावा कुछ नहीं बोल सके...बस इतना ही बोलते रहे कि सबकुछ खत्म हो गया।
बड़ी बहन और छोटा भाई भी इंजीनियर
श्रेयांश की बड़ी बहन सृष्टि आईबीएम गुरुग्राम में इंजीनियर हैं। छोटा भाई शिवांश बंगलूरू में टीसीएस कंपनी में इंजीनियर है। दोनों लॉकडाउन की वजह से आजकल घर से ही काम कर रहे हैं। शुक्रवार को पिता ने श्रेयांश के शहीद होने की खबर दी तो आंसुओं का सैलाब आ गया। मां, बहन और भाई रो-रोकर बदहवास हो गए। बहन बस यही कहते हुए रोती रही कि तेरे वादे तो झूूठे निकले भाई... प्लीज एक बार तो बोल दे। मां बिलखते हुए कहती रहीं कि मेरे बाबू का एक बार चेहरा दिखा दो।