सावन आते ही बाजार घेवर, गुझिया और मावे की मिठाईयों से महकने लगे हैं। मठरी, नमक पारे, मेथी की नमकीन मठरियां मिठाईयों की दुकानों पर सज चुकी हैं। मेरठ में बुढ़ाना गेट से लेकर बेगमबाग, शास्त्रीनगर, आबूलेन, सदर, थापर नगर, शारदा रोड, रेलवे रोड और साकेत के बाजार में मिठाईयों व नमकीन की दुकानों पर इस समय सिंधारे के मिष्ठानों की महक है।
हरियाली तीज पर सिंधारे के लिए सज गए बाजार, पेड़ों से उतर कर घर के आंगन में पहुंचे झूले
नमकीन आयटम में काजू समोसा, मटर समोसा, प्याज़ की कचौड़ी, पालक मठरी आलू मठरी, प्याज़ मठरी, आचार मठरी व देसी घी भुजिया भी हैं। मधुमेह के रोगियों के लिए शुगर फ्री मिठाईयां भी हैं। इसमें खजूर का प्रयोग कर मिठाईयों को तैयार किया गया है। तरह-तरह के गिफ्ट पैक भी बाजार में हैं, जो बेटियों और नन्दों को सामान के साथ दी जा सकते हैं।
रेट लिस्ट
आयटम कीमत प्रति किलो
चॉकलेट घेवर - 480 रू
मलाई पनीर घेवर- 540 रू
मस्ताना घेवर- 480 रू
प्लेन देसी घी घेवर- 400 रू
देसी घी गुजिया- 440 रू
काजू समोसा- 420 रू
मटर समोसा- 280 रू
प्याज़ कचौड़ी- 280रू
आलू , प्याज़ ,और अचार मठरी- 280 रू
काजू रोल- 860रू
काजू रोल- 840 रू
केन, लकड़ी, बांस, स्टील के झूलों का बढ़ गया है ट्रेंड
सावन के महीने की सबसे बड़ी निशानी पेड़ों पर लटकते झूले, उनपर पींगे बढ़ातीं सखियां। मल्हार और झूला गीत गाते हुए युवतियां बगीचों में सावन का आनंद लेती थीं। अब बगीचों से उतरकर ये झूले घरों की शोभा बन गए हैं।
फ्लैट संस्कृति में रहने वाली वर्तमान पीढ़ी पेड़ों पर लटके रस्सी के झूलों का आनंद घरों में लगे आयरन और लकड़ी के झूलों पर ले रही है। युवाओं में लकड़ी, बांस, केन और लोहे के झूलों का क्रेज बढ़ा है। लोग घरों में लोहे व लकड़ी के झूले लगा रहे हैं। ये देखने में सुंदर, आरामदायक और सजावटी तीनों ही हैं।
बाजार में इस समय इंटीरियर डिजायनर और फर्नीचर की दुकानों पर झूलों की मांग बढ़ी है। लोग बेटियों-बहुओं को सिंधारे में देने के लिए ये झूले खरीद रहे हैं। कुछ लोग घर में स्थायी तौर पर रखने के लिए इस प्रकार के झूले ले रहे हैं। बाजार में लकड़ी, लोहा, स्टील, बांस, केन, मेक्रम हर प्रकार के झूले हैं। सुविधानुसार और बजट के मुताबिक ये झूले ले सकते हैं।
अच्छी बात यह है कि इन झूलों को आंगन में लटका सकते हैं। चाहें तो इन्हें बालकनी में लटकाएं। इसके अलावा बगीचे, लॉन, आंगन या घर के किसी छोटे से कोने में भी ये झूले रखे जा सकते हैं। कीमत 5 हजार रुपये से प्रारंभ होकर 35 हजार तक है। हरियाली तीज के लिए विशेष रूप से झूलों की मांग है।
शगुन में भेजने का बढ़ा क्रेज
बेटियों को पहली हरियाली तीज पर लोग सिंधारे में झूले भेज रहे हैं। शगुन के तौर पर अब झूले भेजने का चलन बढ़ गया है। कुछ लोग अपने घर में भी झूले लगवाने के लिए खरीद रहे हैं। - मनन अग्रवाल, संचालक राजकमल फर्नीचर